Saturday, February 21, 2026
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नौतपे के तीसरे दिन पारे ने लगाई छलांग

  • ज्येष्ठ की प्रचंड गर्मी के तीसरे दिन बिलबिलाए लोग
  • हीट वेव के चलते मानव ही नहीं पशु पक्षी एवं जानवर भी हलकान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आज नौतपे का तीसरा दिन है और आसमान से आग बरस रही है। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है, लोग घरों में कैद हैं। मई माह के आखिर और जून की शुरुआत में एक वक्त ऐसा आता है। जब प्रचंड गर्मी पड़ती है। इसकी अवधि नौ दिन की होती है। इसलिए इस नौतपा कहा जाता है। जहां एक तरफ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्यदेव के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा शुरू हो जाता है और रेवाती नक्षत्र तक रहता हैं। वहीं, दूसरी और वैज्ञानिको के अनुसआर अभी तक कोई ऐसी रिपोर्ट तैयार नहीं हुई जो जिसका मानना हो सिर्फ नौ दिन ही सबसे अधिकारी गर्मी पड़ती हैं। वैज्ञानिक डा. एसपी वर्मा का मानना है कि अधिक पापुलेशन बढ़ाने के साथ ही रिसोर्सेस में कमी आयी है। जिससे मैन साइकिल में परिवर्तन आया हैं और गर्मी बढ़ी है।

जलवायु परिवर्तन बन रहा हीट वेव का कारण

मोदीपुरम: तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण पारा 45 डिग्री के पार पहुंच गया है। कहीं-कहीं तो 50 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच चुका है। जोकि एक खतरे की घंटी है। यदि पूरे विश्व की ओर ध्यान दिया जाए तो लगभग 1.5 लाख लोग विश्व में प्रतिवर्ष हीट वेव के कारण मर रहे हैं या प्रभावित हो रहे हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट प्रो. आरएस सेंगर ने बताया कि भीषण गर्मी के चलते आजकल पशु-पक्षी, गिलहरी तथा मानव जीवन अस्वस्थ हो गया है। चिड़िया, जंगली जानवर, कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, गिलहरी भीषण गर्मी से परेशान है और तापमान को बर्दाश्त करने के लिए वह इधर-उधर भटक रहे हैं।

गर्मी से शरीर को सीधा नुकसान होता है। जिससे डायरिया, डेंगू और कई तरह की बीमारियां भी बढ़ती है। इस संकट के चलते वर्षा जनित नदियां सूखने लगते हैं। पानी की धाराएं भी खत्म होने लगती हैं। वनों की नवजात वनस्पतियां प्रजातियों का नुकसान भी जुड़ा हुआ है। खेतीबाड़ी में जुड़े लोगों की फसले मुरझाने लगती है। प्रो. आरएस सेंगर ने बताया कि अब हम सभी लोगों को सोचना है और इस पर चिंतन और मनन करने की आवश्यकता है, क्योंकि यदि ऐसा ही चला रहा तो आने वाली पीढ़ी हमारे कर्मों का फल भुनेंगे और हम इस संकट के शिकार हो जाएंगे हम लोगों को पेड़ों की कटान को रोकना होगा।

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