Saturday, February 21, 2026
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मेडिकल में अनुभवहीन संविदाकर्मी कर रहे इलाज

  • मेडिकल में 393 नर्स और वार्ड ब्वॉय है निजी कंपनी में रजिस्टर्ड
  • अनुभवहीन नर्सिंग स्टॉफ नहीं जानता इंजेक्शन तक देना

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लाला लाजपत रॉय मेडिकल कॉलेज में 22 वार्ड हैं। जिनमें मरीजों को सभी तरह की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती है। जबकि इमरजेंसी व गायनिक और आर्थोपेडिक विभागों समेत ऐसे वार्ड भी है। जिनमें बुखार व अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों को भर्ती करना पड़ता है। जिन मरीजों को इलाज के लिए भर्ती होना पड़ता है। उनकी देखभाल नर्सिंग स्टॉफ की नियुक्ति है। पिछले लंबे समय से परमानेंट नर्सिंग स्टॉफ की भर्ती नहीं की जा रही है। जिसके बदले आउटसोर्सिंग स्टॉफ के जरिए निजी कंपनी से कर्मचारी लिए जा रहे हैं, लेकिन इन कर्मचारियों को नर्सिंग स्टॉफ के काम की टेÑेनिंग नहीं दी जा रही है। जिस वजह से इन्हें मरीजों की देखभाल करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मेडिकल के गायनिक विभाग में एक आउटसोर्सिंग नर्स को इंजेक्शन की सीरिंज तक पकड़ने में परेशानी हुई। जिसकी मौखिक शिकायत आउटसोर्सिंग नर्सिंग स्टॉफ के इचार्ज डा. तरुण पाल से की गई। इसके बाद उन्होंने ऐसे नर्सिंग स्टॉफ को मेडिकल में ही 15 दिन की ट्रेनिंग देने की बात कही, लेकिन सवाल यह कि आखिर बिना ट्रेनिंग के नर्सिंग स्टॉफ को मरीजों की देखभाल करने की जिम्मेदारी कैसे सौंपी जा रही है।

इस समय जीत सिक्योरिटी नाम की कंपनी निजी नर्सिंग स्टॉफ मेडिकल प्रशासन को मुहैया करा रही है। इस कंपनी का मुख्यालय इलाहाबाद में है। बताया जा रहा है कि कंपनी पर अपने यहां रजिस्टर्ड नर्सिंग स्टॉफ को ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी है, लेकिन वह इसका पालन नहीं करा रही है। यह हाल केवल मेरठ का ही नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में इसी कंपनी द्वारा सरकारी अस्पतालों में निजी संविदाकर्मियों की नियुक्तियां दी जाती है।

सभी यूनिवर्सिटी को बस सेवा से जोड़ने की कवायद

मेरठ: आयुक्त स्तर से जनपद की सभी यूनिवर्सिटी को बस सेवा से जोड़ने की कवायद शुरू की गई है। आयुक्त सेल्वा कुमारी जे. ने जनपद की सभी यूनिवर्सिर्टी तक छात्रों को आने-जाने में सुविधा प्रदान करने की दिशा में इस संभावना पर विचार करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया है। उनका कहना है कि महानगर में स्थित अनेक यूनिवर्सिटी तक आने जाने के लिए अभी तक बस सेवा उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण छात्र-छात्राओं को निजी वाहनों का प्रयोग करना पड़ता है। छात्र-छात्राओं को सुविधा देने की कवायद के अंतर्गत वीसी एमडीए, जेडी शिक्षा और मुख्य वित्त अधिकारी महानगर बस सेवा के बीच पहले दौर की बैठक का आयोजन भी किया गया है।

जिसमें यह बात सामने आई है कि अभी तक महानगर सेवा के अंतर्गत 50 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन विभिन्न मार्गों पर किया जा रहा है। निकट भविष्य में 100 नई बसें महानगर बस सेवा के बेड़े में शामिल किए जाने की घोषणा पूर्व में की जा चुकी है। इन बसों के उपलब्ध होने के साथ ही वंचित यूनिवर्सिर्टी तक बस सेवा उपलब्ध कराने का काम किया जाएगा।

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