Friday, March 20, 2026
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पीड़ित परिजन बोले-कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी

  • तय करना है लंबा सफर सजा के आदेश के लिए डाला नकल सवाल
  • वकीलों की राय में इजलाल और शीबा सिरोही को राहत का पर्याप्त ग्राउंड

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोतवाली के तिहरे हत्याकांड में इजलाल व शीबा सिरोही समेत 10 आरापियों को आजीवन कारावास की सजा के बाद मृतकों के परिजनों का कहना है कि अभी काफी लंबा सफर बाकी है। कानूनी लड़ाई खत्म हो गयी, ऐसा नहीं कहा जा सकता। अंजाम तक पहुंचना अभी बाकीहै। तिहरे हत्याकांड का शिकार बने सुनील ढाका के भाई अनिल ढाका ने बताया कि अभी उन्हें कोर्ट से सर्टिफाइड कापी नहीं मिली है। कापी मिल जाए। अपने वकीलों के साथ उसका अध्ययन कर लिया जाए, उसके बाद जो विकल्प बचेंगे, उन पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी काफी कानूनी विकल्प बाकीहैं। आजीवन कारवास की सजा पर सुनील ढाका और सुधीर गिरी के परिजन क्रमश: अनिल ढाका व सतीश गिरी का कहना है कि कोर्ट ने जो सजा शीबा सिरोही व इजलाल को दी है, उस पर कोई टीका टिप्पणी नहीं करेंगे। कोर्ट का सम्मान सर्वप्रथम है। जो मुनासिब समझा वो आदेश दिया है। इस पर कुछ नहीं कहना। हां इतना जरूर है कि जो भी कुछ उनसे इस लड़ाई को आगे ले जाना तथा कसूरवारों को उनके असली अंजाम तक पहुंचाने के लिए बन पड़ेगा वो जरूर करेंगे।

यह बात तय है। हालांकि पुनीत उज्जवल के परिजन आजीवन कारावास से संतुष्ट नहीं। मृतक के भाई का कहना है कि यह क्रूरतम हत्या की श्रेणी में आता है। इसमें फांसी से कम सजा नहीं दी जानी चाहिए। बेहद जघन्य व क्रूर हत्या का अपराध है। सभी इसके लिए बराबर के दोषी हैं। कोर्ट के आदेश की कापी मिलने के बाद अपने वकीलों से राय मश्वरा कर आगे की लड़ाई डाली जाएगी।

रिवीजन पर कामय है डीजीसी

वहीं, दूसरी ओर इस मामले डीजीसी सर्वेश शर्मा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कोर्ट से नकल की कापी के आने का इंतजार है। इसके लिए नकल सवाल डाला गया है। कोर्ट से आदेश की कापी मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रिवीजन तो दायर करेंगे ही। वहीं, दूसरी ओर इस संबंध में आरोपियों के पैरोकार भी चुप नहीं बैठे हैं।

हालांकि कसूरवार ठहराए गए आरोपियों के पैरोकारों का कहना है कि वकीलों से राय ली जा रही है। अभी आदेश की कापी नहीं मिली है। आरोपियों के अधिवक्ता मीडिया से बात करने के मूड में नहीं थे। उन्होंने इतना ही कहा कि यदि कुछ कानूनी कार्रवाई होगी तो मीडिया को खुद ही पता चल जाएगी। वकीलों से ज्यादा तो सक्रिय मीडिया नजर आता है।

अब पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे ही रहना होगा

कोतवाली के तिहरे हत्याकांड के सजायाफ्ता इजलाल व शीबा सिरोही समेत सभी अब मरने तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा। जो नया कानून है उसमें यह जो तब्दीलियां की गई हैं। उसमें आजीवन कारावास यानि मरने तक जेल की सलाखों के पीछे रहने का नियम बना दिया है। हालांकि हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में अपील की स्थिति में आजीवन कारावास की सजायाफ्ता को राहत मिल जाती है। वहीं, दूसरी ओर सीनियर वकीलों की राय में आजीवन कारावास की सजा पाए इजलाल व शीबा सिरोही को कानूनी राहत के लिए पर्याप्त ग्राउंड है।

फौजदारी के बडेÞ वकीलों में शुमार वीरेन्द्र वर्मा काजीपुर का कहना मानना है कि आजीवन सजा याफ्ता शीबा सिरोही व इजलाल तथा अन्य को तकनीकी आधार पर राहत के पर्याप्त आधार मौजूद हैं। बकौल वीरेन्द्र वर्मा इजलाल ने करीब 13 साल का अरसा जेल में काटा है। जमानत पर रिहा होने के बाद जब तलब किया गया तो वह अदालत में हाजिर हो गया। जमानत पर बाहर आने के बाद इजलाल के खिलाफ दूसरे पक्ष ने डराने धमकाने या साक्ष्यों से छेड़खानी का कोई मामला दर्ज नहीं कराया ना ही इस प्रकार की कोई शिकायत जैसी बात लिखा पढ़ी में आयी है।

हाईकोर्ट से पीड़ित को इस ग्राउंड पर बेल का पर्याप्त आधार है। साथ ही वह अपनी कानूनी लड़ाई भी हाईकोर्ट में लड़ सकता है। वहीं, दूसरी ओर यदि शीबा सिरोही की जहां तक बात है तो उसको पुलिस ने अपनी जांच में 120बी का मुजरिम बनाया, लेकिन जब अदालत ने उसको सजा सुनाई तो 302 की मुजरिम ठहरायी गयी। यानि समान रूप से अन्य आरोपियों के साथ अपराधियों में शामिल होना पाया गया। शीबा सिरोही के लिए यह पर्याप्त तकनीकि आधार हाईकोर्ट से राहत के लिए है। एडवोकेट का कहना है कि ये दोनों ही इसी ग्राउंड के सहारे 90 दिन के भीतर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

जेल पहुंचा सजायाफ्ता वारंट का परवाना

तिहरे हत्याकांड के आजीवन कारावास की सजा पाने वाले सभी कसूरवार ठहराए गए मुजरिमों का सजायाफ्ता वारंट अदालत से जेल पहुंच गया है। इसके बाद अब जेल प्रशासन उनसे जेल मेनुअल के हिसाब से बर्ताब करेगा। उनकी बैरक चेंज हो जाएगी। जेल के बंदियों वाली ड्रेस मिलेगी और जो भी जेल मेनुअल की बाते हैं, उसके अनुसार ही उन्हें जेल में दिनचर्चा गुजरनी होगी।

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