Friday, February 13, 2026
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ट्रेनों में उमड़ी भीड़, बहनें हलकान

  • स्पेशल ट्रेन न चलने और साधारण कोच न बढ़ाना बना भारी मुसीबत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: रक्षाबंधन पर ट्रेनों में जबरदस्त यात्रियों की भीड़ उमड़ी। अधिकांश ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिली। बहनों को अपने भाइयों के पास पहुंचने के लिए हलकान होना पड़ा। रक्षाबंधन पर बहनें दूसरे शहरों, कस्बों व गांवों में रहने वाले अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधने के लिए उनके घर जाती हैं, जबकि बड़ी संख्या में भाई भी दूसरे शहरों में रहने वाली बहनों के पास राखी बंधवाने के लिए जाते हैं। ऐसे में बसों, ट्रेनों व अन्य सार्वजनिक वाहनों में यात्रियों की भीड़ उमड़ती है। रक्षाबंधन पर रेलवे ने मेरठ के ट्रैक पर स्पेशल ट्रेन नहीं चलाई और न ही ट्रेनों में साधारण कोच बढ़ाए, इससे यात्रियों के लिए खासी मुसीबत बन गई। सोमवार को रक्षाबंधन के मौके पर ट्रेनों में जबर्दस्त भीड़ रही।

दिल्ली जाने वाली शटल पैसेंजर, डीएम पैसेंजर, टू डीएस, डीएनएस में यात्रियों से खचाखच भरी नजर आर्इं। सहारनपुर जाने वाली वन डीएस पैसेंजर, नौचंदी एक्सप्रेस, जम्मू जाने वाली शालीमार एक्सप्रेस, अहमदाबाद मेल, उत्कल कलिंगा एक्सप्रेस, देहरादून जाने वाली देहरा एक्सप्रेस और खुर्जा जाने वाली खुर्जा पैसेंजर में पैर रखने तक की जगह नहीं मिली। खासी मशक्कत करके यात्री इन टेÑनों में सवार हुए। महिलाओं और बच्चों को ट्रेन के डिब्बे में घुसने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ यात्री तो ट्रेन में चढ़ नहीं पाए। वे स्टेशन से लौट गए और उन्होंने उन्हें परिवहन सेवाओं का सहारा लिया।

लावारिस मरीजों की कलाई पर बांधी राखी तो भर आई आंखें

मेरठ: भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन के त्यौहार पर किसी की कलाई सूनी नहीं रहनी चाहिए। भले ही कुछ भाइयों को उनके अपनों ने ठुकरा दिया हो लेकिन मेडिकल का नर्सिंग स्टॉफ उनके लिए परिवार से कम नहीं है। रक्षा बंधन पर जब इनकी आंखें किसी अपने का इंतजार कर रही थी तो वार्ड में ड्यूटी करने वाली नर्स (सिस्टर) ने बहन का फर्ज निभाते हुए इन मरीजों की कलाई पर राखी बांधकर इनका दर्द बांटा। कलाई पर राखी बंधते ही लावारिस मरीजो की आंखें नम हो गई। उनके पास बहन को देने के लिए तो कुछ नहीं था, लेकिन उनके दिल से जो दुआएं निकली वह किसी अनमोल तोहफे से कम नहीं थी।

सोमवार को रक्षाबंधन का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्तों का गवाह है, लेकिन कुछ ऐसे अभागे भाई भी है जो इस दिन अपनी बहन का इंतजार करते नजर आए। कोई अपना तो उनके पास नहीं आया, लेकिन एक नर्स ने बहन होने का फर्ज निभाते हुए उनकी सूनी आंखों में खुशियों की चमक जरूर भर दी। मेडिकल के लावारिस वार्ड में इस समय कुल 14 मरीज भर्ती है। इनमें नौ पुरुष व पांच महिलाएं है। इन मरीजों को इनके अपनों ने ही ठुकरा दिया है, लेकिन मेडिकल के नर्सिंग स्टॉफ ने इन्हें अपनाया है।

रक्षाबंधन के त्योहार पर लावारिस मरीज धर्मा, शेर सिंह, शोलू, भीम, अमित, सुरेश, हरिदत्त, जयदेवा व राजू की सूनी कलाई पर मेडिकल की नर्स अलीना शादाब ने राखी बांधकर बहन होने का फर्ज निभाया। जैसे ही अलीना ने इन्हें यह कहते हुए राखी बांधी कि वह भी उनकी बहन की तरह है और उनके हर सुख-दुख में उनके साथ है तो इन मरीजों के चेहरे खुशी से खिल गए। अलीना मुस्लिम समुदाय से जरूर है लेकिन वह जानती है कि रक्षाबंधन के त्योहार का क्या महत्व है। अलीना का कहना है वह इन लावारिस मरीजों को खुश रखने की पूरी कोशिश करती है, इसलिए उसने इनकी कलाई पर राखी बांधकर अपना फर्ज निभाया है।

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