जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोविड-19 से उत्पन्न हुई परिस्थितियों के बीच डाक विभाग में अब आधार कार्ड बनवाने वाले लोगों की पहले कोरोना जांच कराई जा रही है।
जिससे डाक विभाग में आधार कार्ड बनवाने वाले लोगों एवं बनाने वाले कर्मचारियों को किसी भी प्रकार से संक्रमण पहले फैले। क्योंकि पहले देखा गया था कि डाक विभाग में एक अधिकारी एवं आधार कार्ड बनवाने वाले कुछ लोग पॉजिटिव पाए गए थे। इसके पश्चात डाक विभाग में हड़कंप मच गया था।
संक्रमण से बचने के लिए डाक विभाग द्वारा सप्ताह में दो दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मिलकर कोरोना जांच शिविर लगाया जाता है। जिसमें आधार कार्ड बनवाने वाले आवेदकों की पहले कोरोना जांच कराई जाती है और रिपोर्ट आने के पश्चात उनका आधार संबंधित कार्य किया जाता है।
इस व्यवस्था से जहां एक बार आवेदकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं लोगों को इसका फायदा भी है कि अब संक्रमण में आने से लोग बच रहे हैं। वहीं अब डाकघर में आवेदकों की भीड़ भी कम होने लगी है।
जानकारों का मानना है कि अगर डाक विभाग द्वारा इस तरह की कार्यप्रणाली नहीं अपनाई जाती तो डाक विभाग कोरोना हॉट स्पॉट बन जाता।
डाकघर में कोरोना का खौफ बरकरार
डाक विभाग में पॉजिटिव केस मिलने से पूर्व की बात की जाए तो काफी संख्या में आधार कार्ड बनवाने के लिए लोगों की भीड़ देखी जाती थी। जिसमें बाहर गेट तक आवेदकों की भीड़ रहती थी।
आधार कार्ड बनवाने वाले सुबह से ही टोकन लेने के लिए आ जाते थे, लेकिन जब से डाक विभाग द्वारा आवेदकों की जांच कराई जाती है और रिपोर्ट आने बाद कार्य किया जाता है।
जब से बदलाव देखने को मिला है। क्योंकि डाक विभाग द्वारा उन्हीं लोगों को टोकन उपलब्ध कराए जा रहे हैं जो जांच प्रक्रिया से के लिए तैयार रहते हैं। बता दें कि शासन द्वारा डाक विभाग को 75 आधार कार्ड व उप डाकघरों में 25 आधार कार्ड प्रतिदिन बनाने के लिए आदेश जारी किए थे।
ताकि लोगों के आधार संबंधित सभी कार्य पूरे किया जा सके, लेकिन कहीं न कहीं उप डाकघरों में आधार व्यवस्था पर कार्य नहीं किया जाता था। जिस कारण प्रधान डाकघरों में की लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। और लोग जल्दी कार्य करवाने के लिए नियमों का पालन नहीं करते थे और एक-दूसरे से लड़ाई झगड़ा भी करते थे।
मगर अब राहत दिखाई दे रही है प्रधान डाकघर के डिप्टी पोस्ट मास्टर रतन सिंह ने बताया कि संक्रमण का ध्यान रखते हुए सभी लोगों का काम किया जा रहा है। जिसमें कि किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती। सप्ताह में दो दिन जांच कराई जाती है। उसके पश्चात लोगों को टोकन देकर आधार संबंधित कार्य किए जा रहे हैं।

