जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: फतेहाबाद में इंडियन नेशनल लोकदल और बहुजन समाज पार्टी के साथ-साथ जननायक जनता पार्टी व आजाद समाज पार्टी के गठबंधन का कोई असर देखने को नहीं मिला है। गठबंधन के प्रत्याशी एक भी सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाए हैं। विशेष बात यह है कि इनेलो-बसपा से फतेहाबाद सीट से चौटाला परिवार की बहू सुनैना चौटाला जबकि टोहाना से इसी परिवार के दोहते कुनाल कर्ण चुनाव लड़ रहे थे। दोनों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ने भी चुनाव प्रचार किया था। इसके बावजूद फतेहाबाद व टोहाना में इनेलो-बसपा प्रत्याशी दस हजार का आंकड़ा भी नहीं छू सके। टोहाना में कुनाल को 9773 जबकि फतेहाबाद में सुनैना चौटाला को 9681 वोट ही मिल पाए हैं।
आपको बता दें कि हरियाणा के 6 जिलों में डेरे के सबसे ज्यादा अनुयायी रहते हैं। फतेहाबाद, कैथल, कुरुक्षेत्र, सिरसा, करनाल और हिसार में इनका व्यापक प्रभाव भी है। हरियाणा के कम से कम 26 विधानसभा क्षेत्रों में डेरे के अनुयायी हैं। डेरे के कुल अनुयायियों की अनुमानित संख्या करीब 1.25 करोड़ आंकी जाती है।
वहीं, इनेलो-बसपा गठबंधन के रतिया विधानसभा सीट से प्रत्याशी रहे पूर्व खेल मंत्री रामसरूप रामा भी कोई खास करिश्मा नहीं दिखा पाए। 69 वर्षीय रामसरूप रामा साल 1996 में हरियाणा विकास पार्टी की टिकट पर रतिया से जीते थे। बाद में उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ.बंसीलाल ने अपनी सरकार में उन्हें खेल मंत्री बनाया था। इस बार छठी बार रामसरूप रामा ने चुनाव लड़ा था, लेकिन वह अपनी जमानत भी नहीं बचा सके हैं।
तीनों ही सीटों पर जजपा-आसपा के प्रत्याशियों का तो इनेलो प्रत्याशियों से भी बुरा हश्र हुआ है। फतेहाबाद सीट से जजपा-आसपा प्रत्याशी सुभाष गोरछिया तो पांचवें नंबर पर रहे। उन्हें मात्र 3249 वोट मिले हैं। उनसे ज्यादा तो फतेहाबाद से निर्दलीय खड़े राजेंद्र काका चौधरी को 5816 वोट मिले हैं। इसी तरह जजपा-आसपा के रतिया से प्रत्याशी रमेश ओड भी मात्र एक हजार वोट लेकर पांचवें नंबर पर रहे हैं। टोहाना में तो जजपा-आसपा प्रत्याशी हवासिंह खोबड़ा मात्र 591 वोट ही ले पाए हैं।
डेरा सच्चा सौदा हरियाणा की सियासत के समीकरण बदलता रहा है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 20 दिन की पैरोल पर आए बाबा रामरहीम खुद भले ही यूपी में बैठे रहे, लेकिन यहां कई सीटों का चुनावी गणित तय कर दिया। वर्तमान चुनाव में सिरसा की दो और हिसार की तीन सीटों के नतीजे कुछ यहीं बयां करते हैं। डेरे के समर्थन से हारने वाले प्रत्याशी जीत गए और जीतने वाले शिकस्त खा बैठे।
हरियाणा के 6 जिलों में डेरे के सबसे ज्यादा अनुयायी रहते हैं। फतेहाबाद, कैथल, कुरुक्षेत्र, सिरसा, करनाल और हिसार में इनका व्यापक प्रभाव भी है। हरियाणा के कम से कम 26 विधानसभा क्षेत्रों में डेरे के अनुयायी हैं। डेरे के कुल अनुयायियों की अनुमानित संख्या करीब 1.25 करोड़ आंकी जाती है। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में डेरे का अच्छा-खासा असर है। अबकी बार डेरे ने अपनी रणनीति बदलते हुए किसी पार्टी के बजाय प्रत्याशियों को तवज्जो दी। यही वजह रही कि कई सीटों के नतीजे चाैंकाने वाले साबित हुए।
डेरे के अनुयायियों ने विधानसभा चुनावों में जीतने वाले प्रत्याशियों को मतदान किया। सिरसा जिले की पांच विधानसभा सीटों पर डेरे के लिए अनुयायियों ने मतदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार जिताऊ, युवा और डेरे से संबंध रखने वाले प्रत्याशियों को समर्थन दिया। इनेलो के प्रत्याशियों को भी पहली बार डेरा समर्थन करता दिखा।
ऐसे मिली है पैरोल
- 30 सितंबर 2024 20 दिन हरियाणा विधानसभा चुनाव
- 13 अगस्त 2024 21 दिन हरियाणा विधानसभा चुनाव
- 20 जनवरी 2024 50 दिन लोकसभा चुनाव
- 21 नवंबर 2023 21 दिन राजस्थान विधानसभा चुनाव
- 20 जुलाई 2023 30 दिन हरियाणा पंचायत चुनाव
- 21 जनवरी 2023 40 दिन हरियाणा पंचायत चुनाव
- 15 अक्टूबर 2022 40 दिन आदमपुर, हरियाणा उपचुनाव
- 17 जून 2022 30 दिन हरियाणा एमसी चुनाव
- 7 फरवरी 2022 21 दिन पंजाब विधानसभा चुनाव
- 4 अक्टूबर 2024 20 दिन हरियाणा विधानसभा चुनाव
ऐलनाबाद सीट को लेकर अभय सिंह चौटाला को जीत की पूर्ण उम्मीद थी। चुनाव से ठीक एक दिन पहले डेरे ने भाजपा और कांग्रेस के मजबूत प्रत्याशियों को समर्थन करने का निर्णय लिया। ऐलनाबाद में भरत सिंह और डबवाली में आदित्य देवीलाल को समर्थन किया। डेरे के पंजाबी समुदाय के अनुयायी खुलकर कांग्रेस प्रत्याशी गोकुल सेतिया का समर्थन करते हुए नजर आए। वहीं, हिसार की तीन सीटों पर डेरे का असर देखने को मिला।
हिसार के पुराने शहर में डेरे के अनुयायी हैं तो नलवा में भी बड़े स्तर पर डेरे के अनुयायी सक्रिय रहते हैं। डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा भी सीधे तौर पर डेरे से जुड़े हुए हैं। डेरे के समर्थन का उन्हें बरवाला और रणधीर पनिहार को नलवा में लाभ मिला।
डेरा सच्चा सौदा पर सीधेतौर पर भाजपा को मतदान करवाने की चर्चाएं रहती हैं। इस बार डेरे ने प्रत्याशियों को देखकर मतदान किया है। सिरसा में जहां बदलाव हुआ है। वहीं, फतेहाबाद में तीनों सीटों पर कांग्रेस जीत गई है। कैथल में भी कांग्रेस को इसका लाभ मिला है।

