Saturday, May 2, 2026
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Sakat Chauth 2025: कल मनाया जाएगा सकट चौथ का पर्व, जानें व्रत कथा और नियम, भूलकर भी न करें ये काम

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सकट चौथ हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस साल यह पर्व 17 जनवरी को मनाया जाएगा। सकट चौथ को तिल चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन दिन भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को रखने से संतान के लिए लंबी आयु, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं सकट चौथ व्रत के नियम, पूजा विधि, पूजा सामग्री और शुभ मुहूर्त क्या है। साथ ही जानेंगे कि सकट चौथ की व्रत कथा और पौराणिक महत्व…

सकट चौथ व्रत की सही तिथि

हिन्दू पंचांग के अनुसार, सकट चौथ का व्रत हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है। इस साल 2025 में सकट चौथ का व्रत 17 जनवरी को रखा जाएगा।

सकट चौथ 2025 शुभ मुहूर्त

लाभ मुहूर्त: सुबह 8:34 से 9:53 तक
अमृत मुहूर्त: सुबह 9:53 से 11:12 तक

सकट चौथ व्रत रखने के नियम

सकट चौथ के दिन भगवान गणेश को उनके हरे रंग के ही कपड़े पहनाना चाहिए।

सकट चौथ के दिन भगवान गणेश को तिलकुट का भोग लगाना न भूलें।

इस दिन तिल से बनी चीजों, तिल के लड्डू या तिल से बनी मिठाई का भोग लगाया जा सकता है।

सकट चौथ के दिन चंद्रमा को जल अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।

सकट चौथ पूजा सामग्री

गणेश जी की प्रतिमा, लाल फूल, 21 गांठ दूर्वा, जनेऊ, सुपारी पान का पत्ता, सकट चौथ की पूजा के लिए लकड़ी की चौकी, पीला कपड़ा, लौंग, रोली, अबीर, गुलाल, गाय का घी, दीप, धूप, गंगाजल, मेहंदी, सिंदूर, इलायची, अक्षत, हल्दी, मौली, गंगाजल, 11 या 21 तिल के लड्डू, मोदक, फल, कलश, चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए दूध, चीनी आदि, इत्र, सकट चौथ व्रत कथा की पुस्तक।

सकट चौथ व्रत कथा

सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और इसे सच्चे मन से करने पर संतान सुख और कष्टों से मुक्ति का वरदान मिलता है। व्रत के साथ सकट चौथ की कथा सुनना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने कार्तिकेय और गणेशजी से पूछा कि कौन देवताओं के कष्ट दूर कर सकता है। इस पर दोनों ने स्वयं को इस कार्य के लिए योग्य बताया। शिवजी ने कहा कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटेगा, वही यह कार्य करेगा। कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर परिक्रमा के लिए निकल गए। इस दौरान गणेशजी ने विचार किया कि उनका वाहन चूहा है, जो पूरे पृथ्वी की परिक्रमा करने में अधिक समय लेगा। तब उन्होंने एक उपाय सोचा और अपने माता-पिता शिव और पार्वती की सात बार परिक्रमा करके वापस बैठ गए। जब कार्तिकेय लौटे, तो उन्होंने स्वयं को विजयी बताया।

भगवान शिव ने गणेशजी से पूछा कि उन्होंने पृथ्वी की परिक्रमा क्यों नहीं की। गणेशजी ने उत्तर दिया कि माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक विद्यमान हैं। उनके उत्तर से शिवजी प्रसन्न हुए और उन्हें देवताओं के कष्टों का निवारण करने का आशीर्वाद दिया। साथ ही, यह भी कहा कि जो व्यक्ति चतुर्थी के दिन श्रद्धा से उनकी पूजा करेगा और चंद्रमा को अर्घ्य देगा, उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। सकट चौथ व्रत का यह पर्व आस्था, संतान के कल्याण और भगवान गणेश की कृपा पाने का प्रतीक है।

इन मंत्रों का करें जाप

गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।

गणेश स्तुति मंत्र

ॐ श्री गणेशाय नम:।
ॐ गं गणपतये नम:।
ॐ वक्रतुण्डाय नम:।
ॐ हीं श्रीं क्लीं गौं ग: श्रीन्महागणधिपतये नम:।
ॐ विघ्नेश्वराय नम:।

गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बूफलसार भक्षितम्।
उमासुतं शोक विनाशकारणं, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्।

सकट चौथ पर भूलकर भी न करें ये काम

  • ऐसा माना जाता है सकट चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं और माताओं को भूलकर भी काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
  • व्रती महिलाएं को इस बात का ध्यान रखना है कि चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैरों पर न पड़ें। जल के छींटे पैरों पर गिरना अशुभ माना जाता है।
  • ऐसी मान्यता है कि सकट चौथ के दिन गणपति जी को मोदक का भोग लगाने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
  • सकट चौथ व्रत के दिन भगवान गणेश की पूजा करते समय केतकी के फूल और तुलसी का उपयोग भूलकर भी न करें। इनका उपयोग पूजन में अशुभ हो सकता है।
  • सकट चौथ की पूजा में गणेश जी की खंडित मूर्ति भूलकर भी न उपयोग करें। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है।
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