जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारत के लिए गौरव का क्षण! ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रचते हुए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल किया है। 25 जून को AXIOM-4 मिशन के तहत रवाना हुए शुभांशु ने 18 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जहां उन्होंने कुल 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए। इनमें 7 प्रयोग इसरो के थे।
अंतरिक्ष में विज्ञान की सेवा
ISS पर अपने मिशन के दौरान शुभांशु ने माइक्रोग्रैविटी यानी शून्य गुरुत्वाकर्षण में जीवन, बायोलॉजी, मेडिसिन और टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रयोग किए। वे 263 किलो वैज्ञानिक सामग्री के साथ धरती पर लौटे हैं, जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
https://x.com/ANI/status/1945054730390044695AXIOM-4 मिशन में भारत का बड़ा निवेश
भारत सरकार ने शुभांशु को इस मिशन में भेजने के लिए 550 करोड़ रुपये खर्च किए। यह निवेश गगनयान मिशन 2027 की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
सफल स्प्लैशडाउन और देश की खुशी
शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम का स्पेस यान प्रशांत महासागर में सफलतापूर्वक स्प्लैशडाउन हुआ। जैसे ही यान ने धरती को छुआ, देशभर में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया से लेकर वैज्ञानिक समुदाय तक, हर कोई इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभांशु और इसरो को बधाई दे रहा है।
आइसोलेशन में रहेंगे 7 दिन
18 दिन तक शून्य गुरुत्वाकर्षण में रहने के कारण, अब शुभांशु और उनके साथी 7 दिन के मेडिकल आइसोलेशन में रहेंगे। इस दौरान उनकी शारीरिक और मानसिक जांच की जाएगी ताकि वे पृथ्वी के वातावरण से फिर सामंजस्य बिठा सकें।
परिवार की भावनाएं
शुभांशु के माता-पिता ने टीवी पर यह पल देखा और भावुक हो उठे। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ हमारे बेटे की नहीं, पूरे भारत की जीत है।”
क्या है अगला कदम?
इस मिशन से मिले अनुभव और आंकड़ों का उपयोग इसरो के गगनयान मिशन 2027 की तैयारी में किया जाएगा। शुभांशु के अंतरिक्ष अनुभव को भारत के अंतरिक्ष विज्ञान में मील का पत्थर माना जा रहा है।

