जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान और तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आयोग “ठीक से काम नहीं कर रहा” और “चोरी में शामिल है”। उन्होंने दावा किया कि उनके पास 100 प्रतिशत सबूत हैं कि चुनाव आयोग ने एक सीट पर धांधली कराई है।
“हम चुनाव आयोग के पीछे पड़ जाएंगे”: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने लोकसभा परिसर में मीडिया से कहा “मैं चुनाव आयोग को सीधा संदेश देना चाहता हूं कि आप सोचते हैं कि आप बच निकलेंगे, तो आप गलत हैं। हम आपके पीछे पड़ जाएंगे। हमने कर्नाटक की एक सीट पर पूरे सबूत इकट्ठे किए हैं कि वहां 100% चुनाव में चोरी हुई है।” राहुल गांधी ने यह भी कहा कि बिहार में लाखों मतदाता मतदान से वंचित हो जाएंगे क्योंकि आयोग “जानबूझकर वोटर लिस्ट से नाम हटा रहा है”।
तेजस्वी यादव ने किया बहिष्कार का ऐलान
राजद नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बुधवार को ऐलान किया था कि उनकी पार्टी आगामी बिहार विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि “चुनाव आयोग को पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में 19% मतदाताओं के नाम हटाने का टास्क दिया है।” तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची से जाति विशेष के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं, जो संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है।
आयोग का पक्ष: 98% मतदाताओं ने फॉर्म भरे
चुनाव आयोग की ओर से बुधवार को जारी बयान में कहा गया कि अब तक 98.01% मतदाताओं के डेटा की जांच पूरी हो चुकी है। पुनरीक्षण में:
20 लाख मृत मतदाताओं की पहचान की गई
28 लाख मतदाता स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं
7 लाख मतदाता दो जगह पंजीकृत हैं
1 लाख मतदाता लापता हैं
15 लाख मतदाताओं के फॉर्म वापस नहीं आए हैं
आयोग के अनुसार, यह प्रक्रिया मतदाता सूची को साफ और पारदर्शी बनाने के लिए की जा रही है।
22 साल में पहली बार हो रहा है गहन पुनरीक्षण
बिहार में 22 वर्षों के बाद पहली बार इतनी बड़ी स्तर पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया जा रहा है। इसका उद्देश्य फर्जी, मृत या अपात्र मतदाताओं को सूची से हटाकर चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ाना है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पहुंचा मामला
इस पूरे विवाद की गूंज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। विपक्षी दलों ने 24 जून को जारी आयोग के निर्देश पर आपत्ति जताते हुए याचिका दायर की है।
चुनाव आयोग ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल करते हुए कहा है कि एसआईआर का मकसद चुनाव में पारदर्शिता बढ़ाना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है, न कि किसी विशेष समूह को निशाना बनाना।

