जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। यूपी सरकार ने कहा है कि जांच से यह स्पष्ट होता है कि राहुल गांधी का बयान पूर्व नियोजित और समाज में नफरत फैलाने की मंशा से प्रेरित था।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि इस मामले में कोई हस्तक्षेप न किया जाए, क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश पूरी तरह वैध और न्यायोचित है।
यूपी सरकार का रुख सख्त
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा, “राहुल गांधी के बयान समाज में नफरत और शत्रुता फैलाने की मंशा से दिए गए थे। यह कार्य भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।”
राज्य सरकार ने शिकायतकर्ता नृपेंद्र पांडे के दावे का समर्थन किया है, जिन्होंने लखनऊ की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी राहत
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लखनऊ की निचली अदालत द्वारा जारी समन और चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की है। उनका तर्क है कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया है और भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिया गया था, जिसका मकसद समाज को जोड़ना था, तोड़ना नहीं।
क्या था विवादित बयान?
यह विवाद 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र में दिए गए राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने वीर सावरकर को “अंग्रेजों का नौकर बताया था और दावा किया था कि वे अंग्रेजों से पेंशन लेते थे।”
इस बयान को लेकर लखनऊ के वकील नृपेंद्र पांडे ने आपत्ति जताते हुए कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ आईपीसी की धारा 153(ए) और 505 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें समन जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणी
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को जारी समन पर अंतरिम रोक लगा दी थी, लेकिन उनके बयान को लेकर कड़ी चेतावनी दी थी। अदालत ने कहा था कि “यदि भविष्य में राहुल गांधी इस प्रकार के अपमानजनक बयान देंगे, तो कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा।”

