Wednesday, January 28, 2026
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CPI में ई-कॉमर्स की एंट्री: अब महंगाई के आंकड़े होंगे और सटीक, Amazon-Flipkart से लिया जाएगा डेटा

नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। भारत सरकार खुदरा महंगाई दर यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) को और अधिक प्रासंगिक व सटीक बनाने के लिए बड़ा कदम उठा रही है। सांख्यिकी मंत्रालय अब CPI की गणना में Amazon, Flipkart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से मिलने वाले दामों को भी शामिल करेगा। इसका उद्देश्य तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार और बढ़ती ऑनलाइन खरीदारी की प्रवृत्ति को CPI आंकड़ों में परिलक्षित करना है।

ई-कॉमर्स डेटा से CPI की गणना होगी ज्यादा मौजूदा

सांख्यिकी मंत्रालय ने बताया कि ई-कॉमर्स अब शहरी भारत के घरेलू खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसे नजरअंदाज करना CPI की मौजूदा स्थिति को अधूरा दर्शाता है। इसी के तहत मंत्रालय ने देश के 12 प्रमुख शहरों से ई-कॉमर्स प्राइस डेटा स्क्रैप करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा कंपनियों से साप्ताहिक औसत कीमतें साझा करने का अनुरोध भी किया गया है।

27 करोड़ से ज्यादा ऑनलाइन खरीदार

2024 में भारत में 27 करोड़ से अधिक लोग ऑनलाइन शॉपिंग कर चुके हैं और यह संख्या हर साल 22% की दर से बढ़ रही है। ऐसे में ई-कॉमर्स कीमतों को CPI गणना में शामिल करना जरूरी हो गया है। अगले साल की शुरुआत से CPI की नई सीरीज लागू होगी, जिसमें ई-कॉमर्स प्राइस डेटा के साथ-साथ हवाई किराए (Airfare) और ओटीटी सब्सक्रिप्शन जैसी डिजिटल सेवाओं के दाम भी शामिल किए जाएंगे।

खर्च की प्राथमिकताएं बदलीं, वजन में बदलाव

नए सर्वे में यह भी सामने आया है कि भारतीय अब अपने कुल खर्च का कम हिस्सा भोजन पर खर्च कर रहे हैं और अन्य आवश्यकताओं, जैसे ट्रैवल, संचार और डिजिटल सेवाओं पर ज्यादा खर्च हो रहा है। इसके अनुसार CPI की “वेटेज” यानी खर्च की श्रेणियों के अनुपात में भी बदलाव किया जाएगा।

नई सेवाएं और इंडेक्स भी शामिल होंगे

CPI में सुधार के साथ ही सरकार एक नया “इंडेक्स ऑफ सर्विस प्रोडक्शन (ISP)” भी लाने जा रही है। यह सेवा क्षेत्र की तिमाही प्रगति को मापेगा। वर्तमान में भारत की GDP में सेवा क्षेत्र का योगदान 50% से अधिक है, लेकिन उसकी ट्रैकिंग नियमित नहीं होती। नया ISP इंडेक्स 2026 तक लॉन्च किए जाने की योजना है।

GDP, रोजगार आंकड़ों में भी होंगे बदलाव

नई GDP सीरीज जल्द ही लागू होगी, जिसका बेस ईयर 2022-23 होगा।

रोजगार आंकड़ों को और सटीक बनाने के लिए पीरियडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुसार बदला गया है।

अब मासिक रोजगार सर्वे 45,000 की बजाय लगभग 90,000 घरों से किया जाएगा।

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