नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह पर्व भगवान विष्णु के चार महीने की योग निद्रा से जागने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन से सभी शुभ और मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण आदि शुरू किए जाते हैं।
देवउठनी एकादशी की तिथि और मुहूर्त
तिथि: शनिवार, 1 नवंबर 2025
एकादशी प्रारंभ: शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025, रात्रि 6:46 बजे
एकादशी समाप्त: शनिवार, 1 नवंबर 2025, दोपहर 4:04 बजे
व्रत पारण समय: रविवार, 2 नवंबर 2025, प्रातः 6:42 बजे से 8:51 बजे तक
देवउठनी एकादशी का महत्व
देवउठनी एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा से जागते हैं। इसे आध्यात्मिक जागरण और धार्मिक अनुष्ठानों का दिन माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से, पूजा करने से और दान देने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।
व्रत विधि
पूरे दिन व्रत रखें और भगवान विष्णु की आराधना करें।
तुलसी चालीसा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन दान करें।
शाम को दीपक जलाकर आरती करें और भजन-कीर्तन करें।
तुलसी विवाह
देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह का आयोजन होता है। इस दिन तुलसी के पौधे का विवाह भगवान विष्णु से किया जाता है। यह धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और विशेषकर उत्तर भारत में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।

