यह चुनाव का समय है। चुनाव के समय में मैं आपके पास आया हूं। लेकिन, यह मत समझिएगा कि मैं चुनाव के लिए ही आपके पास आया हूं। आप तो जानते ही हैं, मैं इतना स्वार्थी नहीं हूं। वह तो इस धरती से मेरा इतना प्यार का संबंध है कि मैं आपके बीच आने से खुद को रोक नहीं पाया। आपको तो पता ही है कि पीएम को कितने काम होते हैं। देश में ही नहीं विदेश में भी क्या-क्या नहीं देखना पड़ता है और क्या-क्या नहीं करना पड़ता है। आपके इस सेवक को अठारह-अठारह घंटे काम करना पड़ता है। पर मैंने कहा कुछ घंटे और सही, लेकिन मुझे अपने परिवारीजन के बीच जाना है। आप लोगों का आशीर्वाद है कि आपके बीच होता हूं तो ऐसी इनर्जी आ जाती है कि सारी थकान अपने आप दूर हो जाती है।
मेरे परिवारीजन, मुझे आपसे वोट नहीं मांगना है। मुझे तो बस आपका आशीर्वाद चाहिए। और मुझे पता है कि अपना आशीर्वाद देने में आप कोई कमी नहीं होने देंगे। हां! आपसे एक वचन जरूर मैं मांगना चाहता हूं। ये जो मेरे विरोधी हैं, इन्हें आप कभी माफ मत कीजिएगा। इन्हें आप अपने वोट के जरिए सजा जरूर दीजिएगा। ये मेरा विरोध करते हैं, इसकी मुझे परवाह नहीं है। ये मुझे गालियां देते हैं, इसकी मुझे परवाह नहीं है। पर ये आपके इस सेवक की मां को गालियां दिलवाते हैं, अपके सेवक की मां को, यह मुझे मंजूर नहीं है। ये हमारी छठ मैया का भी अपमान करते हैं। ये हमारे रामलला के मंदिर तक का विरोध करते हैं। बस आप इन्हें माफ मत कीजिएगा।
ये विरोधी आप को मेरे खिलाफ भडकाने की बहुत कोशिश करेंगे। ये आपको नौकरियों की याद दिलाएंगे। ये आपको पलायन की याद दिलाएंगे। ये आपको पढ़ाई चौपट हो जाने की याद दिलाएंगे। ये आपको अस्पतालों में मवेशी चर रहे होने के किस्से सुनाएंगे। ये आप को हर चीज में आप के राज्य के पिछड़ा रह जाने की याद दिलाएंगे। पर मुझे पक्का यकीन है कि आप इनकी बातों में नहीं आएंगे। मुझे पक्का यकीन है कि आप इसमें नहीं अटकेंगे कि पिछले बीस साल में क्या-क्या नहीं हुआ बल्कि इसको याद रखेंगे कि उससे भी पंद्रह साल पहले क्या हुआ था? जंगल राज था, पूरा जंगल राज। समाज में समरसता खत्म हो गयी थी। छोटे-बड़े का कोई लिहाज नहीं था। कोई भी किसी के भी सामने चारपाई पर बैठ जाता था। कोई भी किसी के भी सामने से चप्पल पहनकर निकल जाता था। और तो और थाना-कचहरी में भी बड़ों को खड़ा रखा जाता था। क्या आप विरोधियों को ऐसा जंगल राज वापस लाने देंगे?
बहनो, भाइयो, विरोधियों का आज जंगल राज अपने देखा है ना। इन्होंने कनपटी पर कट्टा रखकर, मुख्यमंत्री के उम्मीदवार का एलान कराया है। और अब हमें ताना मार रहे हैं कि हम अपने मुख्यमंत्री के उम्मीदवार का एलान कब करेंगे? हमें इनकी तरह मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के नाम का एलान करना चाहिए क्या? हम इनकी इच्छा पूरी नहीं होने देंगे। हम किसी को कनपटी पर कट्टद्दा रखकर मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के नाम का एलान नहीं कराने देंगे।

