जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। हिंदू पक्ष ने 20 जनवरी को याचिका दायर की है, जिसमें मांग की गई है कि इस साल के बसंत पंचमी पर पूरे दिन धार भोजशाला में अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति दी जाए। बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ रही है, और उसी दिन मुस्लिम समुदाय के लोग यहां जुमे की नमाज पढ़ते हैं, जिससे यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ सुनवाई करेगी। याचिका पक्ष से वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन बहस करेंगे, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद बाबा कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दलील देंगे।
विवाद की पृष्ठभूमि
धार में स्थित यह स्थल एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय के लिए यह मौलाना कमालुद्दीन की मजार है। 18वीं सदी में अंग्रेजों ने यहां खुदाई कराई थी और देवी सरस्वती की प्रतिमा भी मिली थी, जिसे अंग्रेज लंदन ले गए और आज भी लंदन संग्रहालय में है। वर्तमान में उस प्रतिमा को भारत वापस लाने की भी कोशिश चल रही है।
एएसआई द्वारा जारी आदेश के अनुसार, हिंदू समुदाय को हर मंगलवार भोजशाला में पूजा करने और मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार नमाज पढ़ने की अनुमति है। इस साल बसंत पंचमी शुक्रवार पड़ रही है, इसलिए हिंदू पक्ष ने पूरे दिन पूजा की अनुमति देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के मद्देनजर धार में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। शहर में आठ हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। विभिन्न इलाकों में पेट्रोलिंग जारी है। भोजशाला परिसर में भी सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए गए हैं। वॉच टावर और पुलिस चौकी बनाई गई हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त हो रही है।

