Thursday, January 22, 2026
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चने की फसल को तीन कीट कर सकते हैं बरबाद

रबी सीजन की प्रमुख दलहनी फसल चना देश के लाखों किसानों की आमदनी का अहम स्रोत है। किसान बेहतर पैदावार की उम्मीद में मेहनत करते हैं, लेकिन मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ कीटों का बढ़ता प्रकोप चना फसल के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। खासतौर पर फली छेदक इल्ली, दीमक और कटुआ कीट चने की फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। समय पर पहचान और नियंत्रण नहीं किया गया तो 30 से 60 प्रतिशत तक उत्पादन घट सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि कीट प्रबंधन किया जाए। किसान बहुत मेहनत से फसल उगाता है। अगर उसे कीट बरबाद कर दें तो भारती नुकसान होता है। किसान की मेहनत बेकार हो जाती है। नुकसान हो जाता है।

फली छेदक कीट सबसे खतरनाक

फली छेदक चना फसल का सबसे नुकसानदायक कीट माना जाता है। इसका वयस्क कीट पतंगा होता है, जबकि इसकी इल्ली फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। प्रारंभिक अवस्था में यह मुलायम पत्तियों और तनों को खाती है और बाद में फली को छेदकर अंदर के दानों को नुकसान पहुंचाती है। इसके प्रकोप से चने की पैदावार 30-40 प्रतिशत तक घट सकती है।

बचाव के उपाय

’ खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाएं

’ नीम आधारित जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें

’ मित्र कीटों को संरक्षण दें

’ अधिक प्रकोप की स्थिति में इंडोसल्फान 35 एउ, क्वीनालफॉस 20 एउ, क्लोरोपाइरीफॉस 20 एउ या प्रोफेनोफॉस 50 एउ का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करें

दीमक से जड़ से कमजोर होती है फसल

दीमक चने की फसल में बुवाई से लेकर कटाई तक नुकसान पहुंचा सकती है। यह जड़ों और तनों को अंदर से खोखला कर देती है, जिससे पौधे पीले पड़कर सूखने लगते हैं। खासकर सूखे और कम नमी वाले क्षेत्रों में दीमक का प्रकोप अधिक देखा जाता है। इससे 30-60 प्रतिशत तक उत्पादन हानि संभव है।

बचाव के उपाय

’ खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद का उपयोग करें।

’ जैविक नियंत्रण के लिए विवेरिया वैसियाना फफूंद का प्रयोग करें।

’ अधिक प्रकोप होने पर इंडोसल्फान 35 एउ या क्लोरोपाइरीफॉस 20 एउ को सिंचाई जल या बालू में मिलाकर खेत में डालें।

कटुआ कीट करता है पौधों को जमीन से काट

कटुआ कीट रात के समय सक्रिय रहता है और पौधों को जमीन की सतह से काट देता है। इससे अंकुरण रुक जाता है और खेत में पौध संख्या कम हो जाती है। यह कीट दिन में मिट्टी के ढेलों या घास के नीचे छिपा रहता है।

बचाव के उपाय

’ खेत की मेड़ पर सूरजमुखी जैसी आकर्षक फसल लगाएं।

’ सूखी घास के ढेर बनाकर सुबह कीटों को नष्ट करें।

’ लाइट ट्रैप का उपयोग करें।

’ नीम तेल व अन्य जैविक कीटनाशकों का छिड़काव करें

कृषि विभाग की सलाह

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान नियमित रूप से खेतों की निगरानी करें। कीटों के प्रारंभिक लक्षण दिखते ही जैविक या रासायनिक उपाय समय पर अपनाएं, ताकि नुकसान को रोका जा सके। सही प्रबंधन से चने की फसल सुरक्षित रखी जा सकती है और किसानों की आमदनी भी बढ़ाई जा सकती है।

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