नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सोना और चांदी बीते कुछ समय से लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। मौजूदा समय में सोना अपने अब तक के सभी स्तरों को पार करते हुए ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। वैश्विक अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर होती मुद्राओं के बीच निवेशकों का भरोसा एक बार फिर सोने पर मजबूती से टिका हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक हालात पूरी तरह स्थिर नहीं होते, तब तक सोने की मांग और कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है।
ब्रह्मांड से धरती तक: सोने की उत्पत्ति की कहानी
पृथ्वी के अस्तित्व में आने से भी बहुत पहले सोने का निर्माण हो चुका था। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, सोना मरते हुए तारों (सुपरनोवा) और न्यूट्रॉन सितारों की टक्कर के दौरान होने वाली भीषण रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बना।
पृथ्वी के शुरुआती पिघले हुए स्वरूप में अधिकांश सोना उसके कोर में समा गया, लेकिन लगभग 4 अरब साल पहले क्षुद्रग्रहों की भारी बमबारी के जरिए यह पृथ्वी की ऊपरी सतह तक पहुंचा — वही सोना जिसे आज हम खनन के जरिए निकालते हैं।
मुद्रा के रूप में क्यों बढ़ा सोने का चलन?
सोना प्राचीन काल से ही मुद्रा के रूप में लोकप्रिय रहा है, इसके कई ठोस कारण हैं:
इसे पिघलाना और आकार देना आसान
उच्च घनत्व और चमक के कारण पहचान में सरल
जंग-रोधी प्रकृति, शुद्ध सोना कभी काला नहीं पड़ता
पीढ़ियों तक सुरक्षित निवेश
इसी वजह से सोना चांदी और अन्य धातुओं की तुलना में अधिक भरोसेमंद माना गया।
जब सोने के लिए छिड़ गई जंग
15वीं–16वीं शताब्दी में स्पेनिश खोजकर्ताओं ने ‘अल डोराडो’ की खोज में अमेरिका में सोने के विशाल भंडार ढूंढ निकाले। इसके चलते इन्का और एज्टेक जैसी महान सभ्यताएं स्पेनिश आक्रमण के कारण लगभग समाप्त हो गईं।
19वीं सदी में अमेरिका (1848) और ऑस्ट्रेलिया (1851) में हुए गोल्ड रश ने दुनिया भर के लाखों लोगों को आकर्षित किया और कई नए शहरों की नींव रखी।
गोल्ड स्टैंडर्ड: जब मुद्रा सोने से बंधी थी
1717: ब्रिटेन ने पहली बार गोल्ड स्टैंडर्ड अपनाया
मुद्रा का मूल्य देश के सोने के भंडार से जुड़ा
1870–1900 के बीच सोने-चांदी का मूल्य अनुपात 15 से बढ़कर 50 हुआ
हालांकि दो विश्व युद्धों और आर्थिक दबावों के कारण यह व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई।
ब्रेटन वुड्स से निक्सन शॉक तक
1944: ब्रेटन वुड्स समझौता — $35 = 1 आउंस सोना
डॉलर बना वैश्विक मुद्रा का आधार
1971: राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने डॉलर को सोने से अलग किया
यहीं से गोल्ड स्टैंडर्ड युग का अंत और फिएट मुद्रा की शुरुआत हुई
इसके बावजूद, केंद्रीय बैंकों के लिए सोना आज भी आर्थिक सुरक्षा की रीढ़ बना हुआ है।
आज कहां से आता है सोना?
आज निकाला जाने वाला सोना मुख्य रूप से कठोर चट्टानी भंडार,नदी किनारे प्लेसर डिपॉजिट से आता है। खनन के बाद निष्कर्षण, रिकवरी और स्मेल्टिंग जैसे जटिल चरणों से गुजरकर ही सोना गोल्ड बार के रूप में तैयार होता है।
सोने के सबसे बड़े उत्पादक देश
दुनिया के शीर्ष 5 सोना उत्पादक देश:
चीन
रूस
ऑस्ट्रेलिया
कनाडा
अमेरिका
वहीं, दक्षिण अफ्रीका की विटवाटर्सरैंड खदानें अब तक दुनिया के लगभग 40% खनन किए गए सोने का स्रोत रही हैं।
किस देश के पास कितना सोना?
अमेरिका: 8,133 टन (सबसे ज्यादा)
जर्मनी: दूसरे स्थान पर
चीन और भारत: टॉप-10 में शामिल
अमेरिका का अधिकांश सोना फोर्ट नॉक्स और फेडरल रिजर्व में सुरक्षित है।
कैसे बढ़ीं सोने की कीमतें?
1935–1964: $35 प्रति आउंस पर स्थिर
1971 के बाद: तेज उछाल, 1980 तक $300+
2015–2024: औसत $1,605
जनवरी 2026: रिकॉर्ड $4,887 प्रति आउंस
सर्राफा बाजार में तेजी के बड़े कारण
कमजोर रुपया और सप्लाई संकट
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सौमिल गांधी के अनुसार, मजबूत निवेश मांग और ₹91.69 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया कीमतों को और बढ़ा रहा है।
अमेरिका-EU तनाव और ग्रीनलैंड विवाद
मिराए एसेट शेयरखान के प्रवीण सिंह के मुताबिक, वैश्विक राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति की चिंता ने सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ाई है।
दावोस और ‘रिसोर्स नेशनलिज्म’
ऑगमोंट की रेनीषा चेनानी बताती हैं कि टैरिफ, नाटो और संसाधन नियंत्रण जैसे मुद्दे बाजारों को अस्थिर कर रहे हैं।

