जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग, जो लंबे समय तक नक्सल हिंसा और उग्रवाद से प्रभावित रहा, अब शांति, विश्वास और लोकतंत्र के नए दौर की ओर बढ़ रहा है। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले के 47 गांवों में, जहां पहले राष्ट्रीय पर्व मनाना संभव नहीं था, इस वर्ष 26 जनवरी को पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। यह दिन बस्तर के इतिहास में लोकतांत्रिक पुनर्स्थापना का प्रतीक बनेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जहां कभी नक्सली हिंसा के कारण विकास ठप था, वहीं आज सुशासन की सरकार बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर को माओवादी उग्रवाद से मुक्त कर विकास और विश्वास के नए युग की ओर ले जा रही है। इन 47 गांवों में तिरंगा फहराना न केवल राष्ट्रीय पर्व का उत्सव होगा, बल्कि यह शांति, लोकतंत्र और विकास की विजय का सशक्त संदेश भी देगा।
दो वर्षों में बस्तर में तेजी से बदलाव
पिछले दो वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति, सुरक्षाबलों की निरंतर कार्रवाई और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से बस्तर में स्थिति में तेजी से सुधार हुआ है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 59 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे सुरक्षा और प्रशासन की प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित हुई है। इस प्रयास के परिणामस्वरूप, पिछले वर्ष बस्तर के 53 गांवों में 76वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया था। इस वर्ष, इस कड़ी में 47 और गांव जुड़ गए हैं, जहां पहली बार गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाया जाएगा।

