- नगर कोतवाल ने एसपी को पत्र लिखकर बंदियों के फरार होने की जताई थी आशंका
- एसपी ने वन विभाग को पत्र लिखकर अस्थाई जेल की छत को छू रही पेड़ की टहनियां कटवाने को कहा था
जनवाणी ब्यूरो |
बिजनौर: अगर समय रहते ही अस्थाई जेल की खामियों को दूर कर दिया होता, तो बंदी फरार नही हो पाते। कोतवाली नगर के इंस्पेक्टर ने मई माह में एसपी को पत्र खिलकर पहले की बंदियों के फरार होने की आशंका जताई थी। बंदियों के फरार होने पर वन विभाग की लापरवाई भी सामने आई है।
शहर कोतवाल आरसी शर्मा ने दस मई को एक पत्र एसपी संजीव त्यागी को लिखा। कोतवाल ने पत्र में कहा गया था कि अस्थाई जेल की खिड़की और दरवाजे बेहद कमजोर हैं। खिड़कियों में जो ग्रिल लगी है वह इतनी कमजोर है कि कोई भी व्यक्ति इन्हें तोड़कर फरार हो सकता है।
अस्थाई जेल के पीछे का भाग पूरा खुला हुआ है। दीवार के सहारे एक बड़े पेड़ की मोटी टहनियां अस्थाई जेल की छत को छू रही है। कोई भी बंदी इस पेड़ पर चढ़कर अस्थाई जेल पर पहुंच सकता है और जेल की छत से नीचे भी उतर सकता है। साथ ही अस्थाई जेल के पीछे और आगे एक गार्द और लगाने की मांग की गई थी।
इस संबंध में एसपी ने वन विभाग को पत्र लिखकर अस्थाई जेल के पास खड़े आम के पेड़ की टहनियां कटवाने के लिए कहा था, लेकिन उस पेड़ की छटाई नहीं हो सकी। इसी पेड़ के सहारे चारों बंदी जेल की छत से नीचे आने में कामयाब हो गए। अस्थाई जेल में कुल 93 बंदी बंद है, जिनमें से चार भाग गए थे, लेकिन पुलिस ने दो को पकड़ लिया है।

