Sunday, March 22, 2026
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मां ब्रह्मचारिणी के दूसरे स्वरूप से मनुष्य को शक्ति मिलती है: पंडित गोपाल

  • नवरात्रों के दूसरे दिन सोशल डिस्टेंस से पूजा अर्चना की

जनवाणी संवाददाता |

नजीबाबाद: नवरात्र महापर्व के दूसरे दिन मंदिरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

बुधवार को नवरात्र पर पंडित गोपाल शर्मा ने कहा कि हजारों वर्षों की कठोर तपस्या करने के कारण ही मां दुर्गा के दूसरे स्वरुप का नाम मां ब्रहमचारिणी पड़ा। इनकी आराधना करने से साधक को सफलता पाने की शक्ति मिलती है। मां ब्रहमचारिणी के अनन्य भक्तों का ऐसा विश्वास है कि माता के दूसरे स्वरूप से मनुष्य को कठोर तपस्या करने की शक्ति मिलती हैे।

क्योंकि हिमालयराज के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने वाली मां ने देवर्षि नारद जी के उपदेश पर भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। इसलिए इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा। मां का यह रूप सिद्धि और विजय प्रदान करने वाला है।

ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है। हजारों वर्षों तक सिर्फ कंद-मूल का सेवन कर भगवान शिव को पति के रूप में पाने की इच्छा से कठोर तप करने वाली देवी ने धीरे-धीरे कंद-मूल भी त्याग कर निराहार ही तपस्या की थी। यही वजह है कि मां का यह दूसरा स्वरूप किसी वाहन पर नजर नहीं आता है।

दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण किए हुए मां का यह तपस्विनी का रूप सभी को लुभाने वाला है। विद्वानों के अनुसार मां से कठोर तपस्या का वरदान लेकर श्रद्धालु कठोर तपस्या से मनवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। चैत्र नवरात्र पर्व के दूसरे दिन उत्साहित श्रद्धालुओं की माता के प्रति आस्था और मां पर अटूट विश्वास का जज्बा देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने सुबह से ही घरों में माता की पूजा-अर्चना की।

हालांकि इस बार कोरोना संक्रण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए काफी कम संख्या में श्रद्धालु नगर के मुख्य मंदिरों में जाते दिखायी दिए। दूसरी ओर श्रद्धालुओं ने घरों में पूजा-अर्चना करने के बाद समीप के ही मंदिरों में पहुंचकर माता विधिवत पूजा-अर्चना कर नारियल, ध्वज, पान, सुपारी व मिश्री आदि की भेंट चढ़ाकर मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की और उनसे तप करने की शक्ति का आशीर्वाद लिया।

संतोषी माता, बसंती माता, मन्सा देवी और प्राचीन श्री माता महाकाली, नव दुर्गा महाकाली समेत नगर के मंदिरों पर काफी कम संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी के दर्शनों और उनकी पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते दिखायी दिए। उधर इस दौरान मंदिरों पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे से दूरी बनाते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन किया।

मंदिरों में प्रवेश करने से पूर्व मधुर आर्य, दिव्यम भारद्वाज, अमित शर्मा, अनीता, अनु शर्मा, राजेंद्र व अनमोल सिन्हा आदि मंदिरों में उमड़ रहे श्रद्धालु ने मंदिरों के बाहर फूलों और माता के श्रृंगार के सामान से सजी दुकानों पर माता के लिए भेंट खरीदते हुए बताया कि माता के इस द्वितीय स्वरूप के दर्शन मात्र से ही जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कठोर संघर्ष करने की शक्ति मिलती है।

जैसे माता ने हजारों वर्षों की तपस्या के दौरान स्वयं कठोर संघर्ष किया था। मंदिरों में कतारों में लगे श्रद्धालु सोशल डिस्टेंसिंग के नियमो का पालन करते हुए नजर आए।

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