Tuesday, March 24, 2026
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लेखक बनने के लिए अच्छा पाठक बनें

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यदि आप अच्छा लिखना चाहते हैं तो भावों की स्पष्टता का खास ध्यान रखें। लिखने की कला के बारे में कहा जाता है कि यह व्यक्ति को पूर्ण बनाता है, क्योंकि लिखने की कला पर मास्टरी के लिए कई विधाओं का ज्ञान अनिवार्य होता है। इस लिहाज से लिखना एक कठिन कार्य है। उस पर भी दोषरहित लेखन का कार्य तो और भी कठिन होता है। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रसिद्द लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने लेखन कला में पूर्णता प्राप्त करने के बारे में कहा था, ‘लिखना एक ऐसा क्राफ्ट है जिसमें हम सभी हमेशा ही नौसिखिए होते हैं और जिसमें कभी भी कोई मास्टर नहीं बन सकता है।’ आशय यह है कि लेखन कला में पूर्णता की प्राप्ति आसान नहीं है, किंतु निरंतर प्रयास, स्वाध्याय और कठिन मेहनत से हम इस कला को निखार सकते हैं, संवार सकते हैं और इसे उत्कृष्ट बना सकते हैं।

आपको यह पता होना चाहिए है कि आप कहना क्या चाह रहे हैं

लिखने की कला में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि हमें यह पता ही नहीं होता है कि हम अपने आलेख में अपने पाठकों को कहना क्या चाह रहे है। कदाचित यही कारण है कि हम सटीक और सहज रूप से लिखने में असफल रहते हैं। आलेख के कंटेंट की जानकारी लेखन की यात्रा का रोडमैप होता है। यह लेखक को भटकाव और भ्रम से बचाता है और सब्जेक्ट मैटर पर फोकस्ड रखता है। इससे लेखन सहज और सारगर्भित बनता है। इसीलिए हमें यह जानना जरूरी है कि आखिर हम कहना क्या चाह रहे हैं।

स्पष्टता का होना लेखन कला की उत्कृष्टता की कसौटी है

चिकित्सा शास्त्र के जन्मदाता हिप्पोक्रेट्स ने आर्ट आॅफ राइटिंग के बारे में एक बार कहा था, ‘आप जो भी कहना चाह रहे हैं, उसे अधिक से अधिक स्पष्ट रूप से कहें। भाषा की क्वालिटी का यह सबसे बड़ा रहस्य है। किसी भाषा का सबसे बड़ा गुण इसकी स्पष्टता है।’ लेखन में स्पष्टता के बारे में प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक विलियम जिन्सेर का तो यहां तक मानना था कि ‘उत्कृष्ट लेखन की चार शर्तें होती हैं- स्पष्टता, संक्षिप्तता, सहजता और मानवता।’ आलेख में कथ्य की स्पष्टता अनिवार्य है। इसके अभाव में अर्थ का अनर्थ हो सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने पाठकों को जो संदेश देना चाहते हैं वह स्पष्ट हो, प्रत्यक्ष हो।

साधारण और छोटे शब्दों का प्रयोग करें, छोटे-छोटे वाक्य लिखें

सामान्य रूप से लेखन में जब सरल और छोटे शब्दों का प्रयोग किया जाता है तो यह अधिक पठनीय और बोधगम्य होता है। यह पाठकों को अपने से बांध कर रखता है। इससे भाव सहज, सुगम और स्पष्ट होता है। वैसे किसी विशेष विधा की राइटिंग के लिए हम बड़े-बड़े शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त जहां तक संभव हो हमें छोटे वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए। जब वाक्य छोटे होते हैं तो पढ़ना और समझना दोनों आसान हो जाता है।

दोहराव से बचना चाहिए

एक ही कंटेंट और आईडिया को रिपीट करना लेखन का सबसे बड़ा दोष माना जाता है। इसलिए इस बात का नियम बना लेना चाहिए कि हर वाक्य और पैराग्राफ एक नया आईडिया को जरूर रिफ्लेक्ट करता हो। किसी भी दो लगातार वाक्यों और पैराग्राफ्स में एक ही विचार की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त कोई विशेष शब्द भी वाक्यों और अनुच्छेदों में बार-बार प्रयुक्त नहीं होना चाहिए। अन्यथा पाठकों का आलेख के प्रति अभिरुचि और आकर्षण खत्म हो जाता है।

छोटे-छोटे पैराग्राफ में लिखें

सिंपल वर्ड्स और शॉर्ट सेंटेंसेज के साथ-साथ उत्कृष्ट लेखन में छोटे पैराग्राफ की भी अहम भूमिका होती है। छोटे पैराग्राफ के परिणामस्वरूप पढ़ना आसान हो जाता है, ध्यान भटकता नहीं है और कंटेंट्स भी आसानी से समझ में आ जाता है। प्रत्येक पैराग्राफ में एक विशेष विचार और भाव का समावेश अवश्य होना चाहिए। लंबे पैराग्राफ्स नीरस होते हैं और इससे पाठकों का इंटरेस्ट क्रमश: घटता जाता है।

एडिटिंग बहुत ही आवश्यक है

प्राय: ऐसा कहा जाता है कि लेखक तीन प्रकार के होते हैं-क्विक राइटर (आशु लेखक), क्वेक राइटर (छद्म लेखक) और क्वालिटी राइटर (गुणवत्तापूर्ण लेखक)। क्विक राइटर कंप्यूटर की गति से भी अधिक तेज गति से लिखता है, क्वेक राइटर किसी दूसरे लेखकों की नकल करता है, उनके लेखों की कॉपी और पेस्ट करता है। क्वालिटी राइटर्स लिखने के पहले प्लान करते हैं, फैक्ट्स और फिगर्स के लिए गहन रिसर्च और स्टडी करते हैं, लिखे गए आलेख को कई बार एडिट, रिएडिट करते हैं।

इन तीनों प्रकार के राइटर्स में एक्सीलेंट लिखने के लिए आवश्यक शर्तों में सबसे महत्वपूर्ण है-एडिटिंग। आलेखों का संपादन किसी शिल्पकार के द्वारा एक अनगढ़े पत्थर के टुकड़े को मनचाहा रूप देने के लिए उसे बड़ी सावधानी से छेनी से गढ़ने जैसा ही होता है। यही कारण है कि यह कार्य आसान नहीं होता है।

एडिटिंग का मुख्य उद्देश्य लेखों की रिराइटिंग, अर्थात फिर से लिखना होता है। इसके अंतर्गत ग्रामर की विभिन्न गलतियों को सुधारने से लेकर भावों और विचारों को भी विभिन्न तथ्यों के आईने में समायोजित करना होता है। कहते हैं कि एक उत्कृष्ट लेख नदी के जल के अविरल प्रवाह जैसा होता है। एडिटिंग में लेखों को परिष्कृत करके इसी प्रकार का प्रवाह प्रदान किया जाता है। अपने आलेख को पढ़ने के समय यदि आपको यह लगता है कि कुछ चीजें आपको रोक रही हैं, या कुछ अटक रहा है तो यह जानिए कि आपके आलेख में अभी भी संपादन और सुधार की दरकार है।

उत्कृष्ट लिखने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें

  • जहां तक संभव हो वाक्यों को एक्टिव वॉयस में ही लिखें।
  • अपनी बातों को प्रत्यक्ष रूप से कहें। रीडर को तुरंत पता होना चाहिए कि लेखक अपने लेख में कहना क्या चाहता है।
  • जब तक जरूरी नहीं हो अलंकारों के प्रयोग से बचें।
  • जहां एक शब्द से भावों का अर्थ स्पष्ट हो जाता हो, वहां दो समानार्थी शब्दों का प्रयोग बिलकुल नहीं करें।
    प्रत्येक दिन लिखने का अभ्यास करें, इससे भाव और विचार सृजन की निरंतरता बनी रहती है।

अपने कथ्य को संक्षेप में लिखें 

  • विषयवस्तु से भटके नहीं। खुद को हमेशा लेख के कंटेंट्स पर कंसन्ट्रेट करके रखें।
  • जिस प्रकार से हम बोलते हैं वैसे ही लिखें। इससे भावों का प्रवाह बना रहता है।
  • एक अच्छा लेखक एक अच्छा कहानीकार होता है। यदि आप अच्छा लिखना चाहते हैं तो अपने लेखों में सूक्तियों, कहानियों, महापुरुषों की जीवनी से संबंधित प्रेरक प्रसंगों को अवश्य शामिल करें। इससे पाठ विश्वसनीय और प्रेरक बनता है, कथ्य पाठकों के दिल को छू जाता है। यह रीडर्स को आपके लेख से बांधे रखता है क्योंकि हर वाक्य में आगे पढ़ने और जानने की उत्सुकता बनी रहती है।
  • प्राय: ऐसा माना जाता है कि एक अच्छा रीडर ही एक अच्छा राइटर होता है। विभिन्न विषयों पर पुस्तकों को पढ़ने से लिखने के लिए विभिन्न प्रकार के विचार सृजित होते हैं, शब्दों के सटीक प्रयोग और राइटिंग स्टाइल डिवलप होता है। एक अच्छा लेखक बने रहने के लिए एक अच्छा पाठक बने रहने की दरकार होती है।
    -एसपी शर्मा                     


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