- सीएम योगी आदित्यनाथ के दौरे के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात
- वैक्सीन के पड़ रहे लाले, रजिस्ट्रेशन के बाद भी नहीं आ रहा नंबर
वरिष्ठ संवाददाता |
सहारनपुर: कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले रोज यहां अपने दौरे के दौरान कुछ मरीजों के आवास पर जाकर उनसे सीधे संवाद किया। उन्होंने अब तक 11 मंडलों के 47 जिलों का भ्रमण किया है। लेनिक, सचाई ये है कि गांवों में हालात अब बदतर हो रहे हैं। संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अधिकारी केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं। महामारी पर नियंत्रण नहीं किया जा सका है।
बता दें कि प्रदेश में पिछले 18 दिनों में लगभग 1 लाख 63 हजार केस कम हुए हैं। अब तक प्रदेश में 4.5 करोड़ से अधिक टेस्ट किये जा चुके हैं। मुख्यमंत्री की पहल पर ही ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने को कहा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां निगरानी समिति की टीम को डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग का जिम्मा दिया गया है।
वहीं लक्षणयुक्त और संदिग्ध मरीजों को मेडिकल किट उपलब्ध कराने को कहा गया है। ऐसे संक्रमित मरीजों को होम आइसोलेशन, क्वारनटाइन सेन्टर अथवा हॉस्पिटल में भेजने के लिए सूची तैयार करने को कहा गया है। लेकिन, सहारनपुर में हालात उलट हैं। लक्षणयुक्त मरीजों की पहचान के लिए कोई उनके घर नहीं जा रहा। केवल कागजी पुलिंदा तैयार किया गया है।
जिला अस्पताल में इस बाबत कोई फोन भी उठाने को तैयार नहीं है। होम आइसोलेशन में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को टेली कंसलटेशन की सुविधा भी हवा-हवाई है। लक्षणयुक्त कितने मरीज चिन्हित किए गए, इसकी जानकारी खुद जिला मलेरिया अधिकारी शिवांका गौड़ को नहीं थी। मुख्यमंत्री की रणनीति का असर सहारनपुर मण्डल में तो कुछ खास नहीं है। यहां मेडिकल कालेज में दाखिर मरीजों की मौतों का सिलसिला नहीं थम रहा है।
मुख्यमंत्री ने सहारनपुर मण्डल में 45 वर्ष से ऊपर के 5 लाख 49 हजार 132 लोगों को वैक्सीन दिये जाने के
कार्य में और अधिक तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन, सचाई ये है कि वैक्शीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के बाद स्लाट ही समय पर बुक नहीं हो पा रहा है। हालांकि, जनपद सहारनपुर में 13 हजार 306 युवाओं को वैक्सीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। सहारनपुर जनपद में 11 और मुजफ्फरनगर जनपद में 6 सहित कुल 17 आक्सीजन प्लांट लगाये जायेंगे। लेकिन, यह काम कब तक होगा, इसका कोई पता नहीं है। सचाई तो यह है कि लोगों का सिस्टम से भरोसा उठ रहा है।

