जनवाणी संवाददाता |
नानौता: प्रदेश के राजस्व एवं बाढ़ नियंत्रण राज्यमंत्री विजय कश्यप का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। एक रोज पहले मंगलवार को उनका निधन हो गया था।
बता दें कि विजय कश्यप सहारनपुर के नानौता के मूल निवासी थे। 56 वर्षीय विजय कश्यप 27 अप्रैल को कोरोना संक्रमित पाए गए थे। कुछ दिन होम आइसोलेशन में रहकर उन्होंने अपना इलाज कराया था। सांस लेने में दिक्कत शुरू हुई तो उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती करा दिया गया, जहां मंगलवार की शाम उन्होंने आखिरी सांस ली।
बुधवार को करीब 12 बजे उनका पार्थिव शरीर नानौता में पहुंचा। पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही पूरा परिवार फूट-फूट कर रोने लगा। परिवार पर कहर टूट गया था। वहीं, इस घोर दुख में परिवार को सांत्वना देने के लिए एवं शोक व्यक्त करने के लिए भाजपा के तमाम दिग्गज नेता उनके आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया। इस मौके पर बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स भी मौजूद रही। आखिरकार मंत्री का अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि विजय कश्यप के बेटे कार्तिकेय कश्यप ने दी।
बता दें कि विजय कश्यप मुजफ्फरनगर जिले के चरथावल सीट से विधायक थे। संघ में भी विजय का बड़ा कद था। वह सहारनपुर के जिला बौद्धिक प्रमुख भी रहे। सहारनपुर जनपद के नानौता के रहने वाले विजय कश्यप का अपनी बिरादरी में खासा जनाधार माना जाता था।
पहली बार 2007 में चरथावल से चुनाव लड़े, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह चरथावल सीट से विधायक निर्वाचित हुए। विजय कश्यप भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य रहे थे। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा प्रत्याशी मुकेश चौधरी को 23 हजार से ज्यादा मतों से शिकस्त दी थी।

