जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगरायुक्त डा. अरविन्द चौरसिया के स्टेनो योगेन्द्र शर्मा की नियुक्ति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इसकी शिकायत की गई है, जिसमें फर्जी नियुक्ति होने का आरोप लगाया है। उधर, शासन स्तर से इसकी जांच कमिश्नर अनीता सी मेश्राम को सौंप दी है।
योगेन्द्र शर्मा की नगर निगम में चुंगी अनुचर के पद पर नियुक्ति हुई थी। चुंगी खत्म होने के बाद योगेन्द्र शर्मा की तथाकथित रूप से प्रोन्नति कैसे कर दी? इसको लेकर बवाल मचा हुआ है। इसके साक्ष्य भी शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे हैं, जिसको आधार बनाकर जांच पड़ताल भी आरंभ कर दी गई है।
महत्वपूर्ण तथ्य ये है कि अनुचार का वेतन नगरायुक्त के स्टेनो के रूप में कैसे निकाला जा रहा है ? इसमें वित्तीय अनियमितता बरती जा रही है। आला अधिकारी भी इस वित्तीय अनियमितता में शामिल है, जिसको लेकर जांच में कई अधिकारी भी फंस सकते हैं।
आरोप है कि वर्ष 2019 से इस फर्जीवाड़े की शिकायत की जा रही है,मगर इसकी जांच को नगरायुक्त स्तर से दबाव दिया जाता है। यही नहीं, लगातार वेतन भी स्टेनो के पद के अनुसार प्रत्येक माह निकाला जा रहा है। योगेन्द्र शर्मा की प्रोन्नति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब एक वर्ष से नगर निगम क्यों नहीं दे रहा हैं?
बार-बार शासन स्तर से पत्र आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद इनको दबा दिया जाता है। वेतन पर भी किसी तरह की वित्तीय अनुभाग की तरफ से रोक नहीं लगाई गयी है। फिलहाल इस मामले की जांच कमिश्नर अनीता सी मेश्राम करेगी, जिसके बाद ही नियुक्ति को लेकर स्थिति साफ होगी।

