-मनरेगा में अंधेरगर्दी का खेल! फर्जी जॉब कार्ड, रात की तस्वीरें और घोस्ट वर्कर
-ग्राम प्रधान, सचिव समेत कई आरोपी, जिलाधिकारी से तत्काल कार्रवाई की मांग
जनवाणी संवाददाता।
मुजफ्फरनगर: जिले के सदर ब्लॉक स्थित नरा गांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत चल रही योजनाओं में एक बड़े और सुनियोजित घोटाले का पदार्फाश हुआ है। लोकपाल मनरेगा नीरज कुमार शर्मा की 39 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है, जिसमें लाखों रुपये की वित्तीय हेराफेरी, फर्जी जॉब कार्ड बनाने और बिना काम किए भुगतान करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह रिपोर्ट मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में चल रही अंधेरगर्दी का एक जीता-जागता प्रमाण है।
इस बड़े घोटाले की परतें नरा गांव के जागरूक नागरिकों शकील अहमद, एडवोकेट इमाम अली, हारून, इमरान, तीरथपाल और कंवरपाल द्वारा लोकपाल से की गई शिकायत के बाद खुलीं। शिकायतकतार्ओं ने लोकपाल को बताया कि उनसे बिना कोई काम लिए ही उनके फर्जी फोटो खींचे जाते थे और उनके जॉब कार्ड बनवाकर मनरेगा खातों में पैसे डलवा दिए जाते थे। लेकिन, यह पैसा असल में मजदूरों को नहीं मिलता था, बल्कि खाताधारकों के माध्यम से वापस ले लिया जाता था। गरीब मजदूरों के हक पर डाका डालने का यह शर्मनाक खेल महीनों से चल रहा था।
लोकपाल की तेज नजर: 39 पन्नों की रिपोर्ट ने खोल दी हर पोल
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए, लोकपाल मनरेगा नीरज कुमार शर्मा ने नरा गांव का खुद निरीक्षण किया और संबंधित सभी दस्तावेजों की गहन पड़ताल की।
उनकी 39 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट ने ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए फजीर्वाड़े की एक-एक परत खोल दी है। रिपोर्ट में सामने आए कुछ मुख्य खुलासे चैंकाने वाले हैं।
घोस्ट वर्कर और फर्जी जॉब कार्ड
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शकील अहमद के नाम से फर्जी जॉब कार्ड बनाया गया और वर्मी कंपोस्ट खाद के गड्ढे के नाम पर लाखों रुपये का झूठा काम दिखाया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि शकील अहमद के खाते में तो कोई भुगतान हुआ ही नहीं। इसी तरह, इमाम अली के खाते में भी फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर फर्जी काम दशार्या गया, लेकिन उससे जुड़ा पैसा किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति के खाते में भेज दिया गया। यानी, काम किसी का और पैसा किसी और की जेब में।
रात के अंधेरे में काम की तस्वीरें
मनरेगा के काम को प्रमाणित करने के लिए जियो-टैग्ड तस्वीरें लगाई जाती हैं, जिनमें काम करने वालों और काम की जगह की जानकारी होती है। लेकिन, लोकपाल की जांच में जो तस्वीरें मिलीं, वे रात 11 बजे से 12 बजे के बीच खींची गई थीं! ये तस्वीरें साफ बताती हैं कि मजदूरों से असल में कोई काम नहीं करवाया गया, बल्कि सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति की गई, वह भी रात के अंधेरे में।
फर्जी शपथ पत्र और एडीओ की संदिग्ध भूमिका
जांच में सहायक विकास अधिकारी (एडीओ) सदर ब्लॉक द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट और उसके साथ संलग्न शपथ पत्रों को भी फर्जी पाया गया। शिकायतकतार्ओं ने साफ इनकार किया कि उन्होंने ऐसे कोई शपथ पत्र कभी दिए ही नहीं, जिससे एडीओ की पूरी रिपोर्ट और उनकी भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।
लाखों की रिकवरी और सख्त कार्रवाई की उम्मीद
लोकपाल नीरज कुमार शर्मा की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि इन सभी अनियमितताओं के लिए ग्राम सचिव, ग्राम प्रधान और उनके अन्य सहयोगी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। जांच से यह भी पता चला है कि फर्जी भुगतान के माध्यम से लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई है और इस रकम की पूरी वसूली (रिकवरी) की प्रबल संभावना है।
जिलाधिकारी को सिफारिश: कठोरतम कार्रवाई हो
लोकपाल मनरेगा नीरज कुमार शर्मा ने इस पूरे घोटाले की विस्तृत जानकारी जिलाधिकारी को भेज दी है और उनसे तत्काल और कठोरतम कार्रवाई करने की सिफारिश की है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और जनता के गबन किए गए धन की जल्द से जल्द वसूली की मांग की है। यह मामला दिखाता है कि कैसे कुछ भ्रष्ट लोग सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करके गरीब मजदूरों के हक को मारते हैं। अब देखना होगा कि जिलाधिकारी इस गंभीर मामले में क्या एक्शन लेते हैं और नरा गांव के मजदूरों को कब न्याय मिलता है।

