डॉक्टर रूप कुमार बनर्जी
सर्दी का मौसम आते ही ठिठुरन से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय अपनाने लगते हैं। खासकर ग्रामीण, कस्बाई और निम्न-आय वर्ग के क्षेत्रों में आज भी अंगीठी, कोयला, लकड़ी या गैस हीटर का उपयोग आम है। वहीं शहरी इलाकों में इलेक्ट्रिक हीटर का चलन बढ़ गया है, परंतु यह सर्दी से राहत देने वाला साधन कब जानलेवा बन जाए, इसका अंदाजा अधिकतर लोगों को नहीं होता। हर वर्ष इस भयानक ठंड के मौसम में देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी दु:खद खबरें सामने आती हैं, जिनमें बंद कमरे में अंगीठी या हीटर जलाकर सोने से पूरे परिवार की मौत तक हो जाती है। यह घटनाएं केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य और अज्ञानता का परिणाम हैं।
अंगीठी, कोयला, लकड़ी और गैस के अधूरे दहन से कार्बन मोनोआक्साइड नामक अत्यंत विषैली गैस निकलती है। यह गैस ना तो दिखाई देती है,न इसकी कोई गंध होती है और न ही इसका स्वाद महसूस होता है। इसी कारण इसे ‘खामोश हत्यारा’ भी कहा जाता है। बंद कमरे में यह गैस धीरे-धीरे जमा होती रहती है। सोते हुए व्यक्ति को इसका आभास तक नहीं होता। यह गैस शरीर में जाकर रक्त में मौजूद आॅक्सीजन की जगह ले लेती है, जिससे मस्तिष्क तक आॅक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है, हृदय व फेफड़ों पर गंभीर असर पड़ता है और व्यक्ति गहरी बेहोशी में चला जाता है। कई मामलों में मृत्यु भी हो जाती है। सबसे खतरनाक बात तो यह है कि व्यक्ति को बचाव का मौका भी नहीं मिल पाता।
कार्बन मोनोआक्साइड के प्रभाव से निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं— तेज सिरदर्द ,चक्कर आना , मतली या उल्टी , घबराहट, अत्यधिक नींद आना, सांस लेने में कठिनाई , सीने में जकड़न। दुर्भाग्यवश ये लक्षण अधिकतर सोते समय या रात में होते हैं, जब व्यक्ति उन्हें पहचान ही नहीं पाता। सुबह तक स्थिति जानलेवा हो जाती है। ये लोग सबसे अधिक खतरे में होते हैं। कुछ वर्ग इस खतरे के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं जैसे -नवजात और छोटे बच्चे, बुजुर्ग, हृदय व फेफड़ों के रोगी, उच्च रक्तचाप से ग्रस्त रोगी, दमा या टीबी से पीड़ित व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं। इनके लिए थोड़ी-सी भी लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है।
केवल अंगीठी ही नहीं, हीटर का गलत उपयोग भी खतरनाक है जैसे-शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका, कंबल या कपड़ों के सुलगने का खतरा, बच्चों के झुलसने की संभावना आदि। वही गैस हीटर से गैस रिसाव, दम घुटना, विस्फोट या आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इन दुर्घटनाओं में हर साल सैकड़ों लोग घायल या मृत होते हैं। इसलिए हमारा मानना है कि बंद कमरे में अंगीठी जलाकर कभी न सोएं, कोयला या लकड़ी जलाकर दरवाजे-खिड़कियां बंद न करें, हीटर का प्रयोग करते समय कमरे में उचित वेंटिलेशन रखें। हीटर और ब्लोअर के सामने एक बर्तन में पानी भर कर रख दें, खिड़की या रोशनदान थोड़ा खुला अवश्य रखें, सोने से पहले हीटर बंद कर दें, बच्चों को हीटर या अंगीठी से दूर रखें, सिरदर्द, चक्कर या घबराहट महसूस होते ही तुरंत खुले स्थान में जाएं, आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
ठंड से बचने के लिए ऐसे उपाय अपनाएं जो सुरक्षित भी हों और लाभकारी भी जैसे-गर्म कपड़े, टोपी, दस्ताने और मोजे पहनें, मोटे और सूखे कंबल प्रयोग करें, गुनगुना दूध या हल्दी वाला दूध, गरम-गरम सूप, दिन में एक बार काढ़ा और गरम पानी, अगर धूप निकले तो सुबह की धूप का सेवन, हल्का फुल्का व्यायाम और शरीर को सक्रिय रखना। ये उपाय न केवल ठंड से बचाते हैं, बल्कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। ठंड से बचाव आवश्यक है, लेकिन गलत तरीका जीवन के लिए घातक हो सकता है। थोड़ी-सी समझदारी, सही जानकारी और सतर्कता से अनेक अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है। यह समय है कि हम स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार, पड़ोस और समाज को भी इस खामोश खतरे के प्रति सचेत करें क्योंकि सावधानी ही सच्ची सुरक्षा है।

