Monday, March 23, 2026
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UP: किन्नर समाज में बड़ा बदलाव, सलाम की जगह अब “राम-राम” का बोलबाला, हजारों की तादाद में धर्म परिवर्तन

जनवाणी ब्यूरो |

यूपी: किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि ने दावा किया है कि पिछले कुछ वर्षों में किन्नर समाज में धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से बड़ा परिवर्तन आया है। उन्होंने बताया कि पहले किन्नर समाज की गद्दियां और परंपराएं इस्लामिक प्रभाव से जुड़ी हुई थीं, लेकिन किन्नर अखाड़े के गठन के बाद इनमें महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।

महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि ने बताया कि अब किन्नर समाज के सम्मेलन, समूह बैठकों और पंचायतों में सलाम की बजाय “राम-राम” का अभिवादन होने लगा है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में महाकुंभ-2025 के बाद देशभर में उन किन्नरों की घर वापसी कराई गई, जो पहले खुद को अल्पसंख्यक मानने लगे थे।

महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि ने किन्नर समाज में हो रहे सामाजिक और धार्मिक बदलावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके अनुसार, अब तक लगभग 10 हजार किन्नर इस्लाम की परंपराओं को छोड़कर हिंदू धर्म अपना चुके हैं। उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रयागराज के कटरा क्षेत्र में जन्म लेने के बावजूद, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 2011 में दिल्ली जाकर मुस्लिम परंपराओं को अपनाने पर मजबूर होना पड़ा था।

लेकिन 2020 में हरिद्वार कुंभ के दौरान आचार्य लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी से मुलाकात के बाद उनके जीवन में एक नया मोड़ आया। किन्नर अखाड़े से जुड़ने के बाद उन्होंने धर्म, शिक्षा, संस्कृति और समाज को एकजुट करने के लिए कार्य शुरू किया।

“अब राम-राम बोला जा रहा है”

महामंडलेश्वर ने बताया कि पहले किन्नर समाज में सलाम की परंपरा थी, लेकिन अब इसमें बदलाव आया है। अब किन्नर समाज के लोग एक-दूसरे से “राम-राम” बोलते हैं, और वे हिंदू परंपराओं का पालन करने लगे हैं। पहले जहां किन्नर खुद को अल्पसंख्यक मानते थे और बधाई देने तक से परहेज करते थे, अब वे छठ पूजा जैसी हिंदू परंपराओं का हिस्सा बन चुके हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, बिहार, केरल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में किन्नर समाज के लोग सनातन धर्म से जुड़ रहे हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक बदलाव

महामंडलेश्वर ने यह भी बताया कि कई किन्नर अब रुद्राक्ष की माला पहन रहे हैं, तिलक लगाकर सनातन धर्म के सम्मेलनों में भाग ले रहे हैं और वैष्णो देवी के दर्शन करने जा रहे हैं। माघ मेले में आने की इच्छा रखने वाले किन्नरों से भी उन्होंने संपर्क किया है, जो हिंदू धर्म अपनाने की इच्छा रखते हैं।

किन्नरों का शोषण

इसके साथ ही, महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि ने किन्नर समाज के साथ होने वाले शोषण की बात भी उठाई। उन्होंने बताया कि किन्नरों को अक्सर शादी का झांसा देकर ठगा जाता है, जबकि ईश्वर ने उन्हें शृंगार और नृत्य की कला का आशीर्वाद दिया है, जिससे वे अपनी आजीविका कमाते हैं।

किन्नर समाज की पहचान

महामंडलेश्वर ने यह भी दावा किया कि किन्नर समाज देश में अन्य समुदायों से भी बड़ी संख्या में मौजूद है और किन्नर अखाड़ा आने वाली पीढ़ियों के लिए सनातन मूल्यों की रक्षा करने और किन्नर समाज को सम्मानजनक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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