- बार एसोसिएशन के कुछ पदाधिकारियों और पूर्व विधायक ने दिखाई रुचि
- गत दिवस कोर्ट में पेश नहीं किया, 25 करोड़ जमा करने के बाद मिली जमानत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: 25 करोड़ रुपये की सीजीएसटी चोरी के मामले में गिरफ्तार किये गए आरोपी को वकीलों की हड़ताल के बाद भी सेटिंग कराकर कोर्ट में पेश किया गया जहां उसे 25 करोड़ 53 लाख रुपये जमा करने के बाद सशर्त जमानत पर रिहा कर दिया गया है।
हैरानी की बात यह है कि अदालत के आदेश पर आनन फानन में वेरीफिकेशन होने के बाद प्रोवीजनल जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद सीजीएसटी के अधिकारी आरोपी को गाड़ी में बैठाकर लेकर चले गए।
मोहनपुरी निवासी ब्रज मोहन शर्मा को सीजीएसटी कमिशनरेट ने 25 करोड़ 53 लाख रुपये की टैक्स चोरी के मामले में गुरुवार को गिरफ्तार किया था। ब्रज मोहन शर्मा पर फर्जी बिलों के आधार पर वस्तुओं की वास्तविक सप्लाई के बिना गलत तरीके से आईटीसी प्राप्त कर लगभग 25 करोड़ रुपये के चोरी का आरोप है।
गुरुवार को अधिकारी इस आरोपी को लेकर कोर्ट में आए लेकिन उसे अदालत में पेश नहीं किया। उस वक्त बार के कुछ पदाधिकारी और एक पूर्व विधायक ने आकर जीएसटी अधिकारियों को दबाव में लिया और उसे कोर्ट में पेश नहीं होने दिया। जीएसटी अधिकारी आरोपी को लेकर सिविल लाइन थाने आए और दखिल करा दिया।
शुक्रवार को आरोपी को लेकर पुलिस फिर से स्पेशल सीजेएम की कोर्ट में आई। इस दौरान आरोपी की तरफ से वकील ने अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उस पर कर चोरी के आरोप बेबुनियाद हैं। अदालत में पेश किये कागजों में चार मार्च को 25.53 करोड़ जमा करना दिखाया गया।
अदालत ने आरोपी ब्रज मोहन शर्मा को पांच पांच लाख रुपये के दो जमानती जिसमें एक जमानती परिवार का नजदीकी सदस्य होने के बाद रिहा करने के आदेश दिये। इसके अलावा आरोपी को पासपोर्ट जमा करने और जमानत पर छूटने के बाद विभागीय जांच में सहयोग करने के आदेश किये गए।
जिस बार एसोसिएशन ने हड़ताल के दौरान कुछ वकीलों के कोर्ट में जाने के कारण उन पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन उसी बार के कुछ पदाधिकारी सीजीएसटी चोरी के आरोपी को लाभ पहुंचाने के लिये हड़ताल के दौरान कोर्ट में गए।
एक वकील की तरफ से जमानती प्रार्थना-पत्र तक दाखिल किया गया। सवाल यह उठ रहा है कि जब आरोपी ने 25 करोड़ 53 लाख रुपये जमा कर दिये थे फिर उसे कोर्ट में क्यों लेकर आए थे। अगर कोर्ट में लेकर आए फिर आरोपी को कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया।
जिसको जाना चाहिये था जेल, वो घूम रहा था जीप में
25 करोड़ की सीजीएसटी चोरी के आरोपी के मामले में सीजीएसटी और पुलिस ने मिलकर जमकर खेल किया। जब स्पेशल सीजेएम ने आरोपी का गिरफ्तारी रिमांड बना दिया फिर भी पुलिस उसे जेल लेकर नहीं गई बल्कि जीएसटी अधिकारियों की गाड़ी में बैठकर घूमता रहा। अदालत बंद होने से ठीक पहले जमानती पत्र वेरीफिकेशन के लिये गए और आरोपी को प्रोवीजन पर छोड़ दिया गया।
25 करोड़ की सीजीएसटी चोरी के मामले में ब्रज मोहन शर्मा को शुक्रवार को स्पेशल सीजेएम की कोर्ट में पेश किया गया। जहां पर अदालत ने उसका रिमांड बना दिया। नियम के तहत पुलिस आरोपी को लेकर जेल में दाखिल कर देना होता है। अगर किसी कारण से आरोपी को जेल नहीं भेजा गया तो उसे कोर्ट की कस्टडी में रखा जाता है। शाम के समय आरोपी के वकील की तरफ से जमानती प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया।
पांच बजे कोर्ट बंद हो गई थी। इसके बाद वेरीफिकेशन के लिये कागज भेजे गए। इस दौरान कोर्ट ने आरोपी को प्रोवीजनल जमानत पर छोड़ने के आदेश कर दिये। कोर्ट की कस्टडी में रहने के बजाय आरोपी सीजीएसटी के अधिकारियों के साथ था।
इस पूरे मामले में पुलिस और जीएसटी के अधिकारियों के खेल का पूरा फायदा आरोपी को मिला। सवाल यह उठता है कि आरोपी के द्वारा गुरुवार की शाम को सात बजे के करीब 25 करोड़ 53 लाख रुपये जमा कराए गए। इतनी बड़ी रकम एक झटके में जमा करा दी गई। अगर रकम जमा हो गई थी फिर सीजीएसटी के अधिकारियों को आरोपी को कोर्ट में पेश नहीं करना चाहिये था।

