Saturday, March 14, 2026
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सोढी के लिए अड़ा संघ, कैंट बोर्ड सदस्यों को अल्टीमेटम

  • शुचिता के नाम पर तलवार भांजने वालों पर आरोपों को लेकर उठ रहे सवाल
  • परिजनों की मार्फत दी तत्काल क्षेत्रीय कार्यालय पर संपर्क करने की हिदायत
  • अवैध निर्माण, मुटेशन में धांधली, कार्यकर्ताओं की अनदेखी सरीखे आरोप
  • कैंट बोर्ड प्रशासन के बडे अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोलना भी पड़ रहा महंगा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: विपिन सोढी की दोबारा उपाध्यक्ष की कुर्सी पर ताजपोशी के लिए संघ अड़ गया है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कैंट बोर्ड के अंडरग्राउंड चल रहे सदस्यों को तत्काल क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क करने की हिदायत दी गई है। हालांकि तमाम प्रकार के आरोपों से घिरे सोढी की पैरवी को लेकर संघ के उन पदाधिकारियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं जो अब तक शुचिता की पैरवी करते रहे हैं।

रविवार की शाम को क्षेत्रीय कार्यालय पर कोर कमेटी की बैठक में भी छह गायब चल रहे बोर्ड के सदस्यों का इंतजार किया गया। हालात बगावत सरीखे नजर आ रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि रिटर्न टिकट हासिल करना वार्ड आठ से बोर्ड सदस्य विपिन सोढी के लिए दिन-पर-दिन अब मुश्किल होता जा रहा है।

हालांकि जहां तक समर्थकों की बात है तो वो अब भी सोढी के नाम की ही ताल ठोक रहे हैं। उनके दावों पर यकीन किया जाए तो सोढी का ही नाम उपाध्यक्ष के लिए फाइनल है। हालांकि इससे पहले धर्मेंद्र सोनकर का नाम लिया जा रहा था। वहीं दूसरी ओर संगठन, संघ व बोर्ड के जानकारों की मानें तो सोढ़ी के लिए रिटर्न टिकट की राहें लगातार मुश्किलें होती जा रही हैं।

बंगला-105 बना गले की फांस

बतौर उपाध्यक्ष उनके कार्यकाल को लेकर विरोधी खेमे में तमाम चिट्ठे खोल कर रख दिए हैं। सबसे ज्यादा फजीहत करियप्पा स्ट्रीट स्थित बंगला-105 को लेकर हो रही है। इस बंगले को रिज्यूम किए जाने के लिए सेना की ओर से डीईओ व सीईओ कार्यालय को पत्र लिखा जा चुका है। रिज्मशन की कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए सेना ने कर्नल रैंक के अपने दो अफसरों की रिपोर्ट भी लगवा दी है। आरोप है कि उसके बाद भी इस बंगले के एक बडेÞ हिस्से को होटल मालिक बंधुओं का बेच दिया गया है।

कैंट अफसरों की भूमिका संदिग्ध

इतना ही बेचे गए हिस्से में तेजी से अवैध निर्माण कराया जा रहा है। अवैध निर्माण को लेकर सीईओ व डीईओ कार्यालय की चुप्पी पर भी हैरानी जताई जा रही है। पूछा जा रहा है कि जब बंगले को रिज्यूम किए जाने का पत्र सेना की ओर से भेजा जा चुका है तो फिर इसमें अवैध निर्माण कैसे चल रहा है और क्यों इस पर सीईओ व डीईओ के अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं। जनवाणी ने ही सबसे पहले इस बंगले में शुरू किए गए अवैध निर्माण का खुलासा किया था। उसके बाद यहां आनन-फानन में पुताई करा दी गई ताकि निर्माण को पुराना साबित किया जा सके।

म्यूटेशन में लेन-देन के आरोप

इसके अलावा रिटर्न टिकट में दूसरी बड़ी अड़चन बोर्ड के बाकी सदस्यों से तनातनी खासतौर से म्यूटेशन के मामलों को लेकर लगाए गए आरोप हैं। माना जा रहा है कि म्यूटेशन को लेकर किए गए खेल की जांच कैंट बोर्ड प्रशासन ने शुरू कर दी हैं। 100 से ज्यादा फाइलें जिनके म्यूटेशन में लेन-देन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, उनकी जांच की जा रही है। रजबन स्थित पंजाबी तड़का सरीखे करीब पूरे कैंट में दर्जन भर से ज्यादा अवैध निर्माण ऐसे बताए जाते रहे हैं, जिनको लेकर गंभीर आरोप हैं।

बाउंड्री रोड खोखा स्थल आवंटन

सबसे बड़ा गंभीर आरोप तो अपने चहेते के नाम बाउंड्री रोड पर खोखे के लिए जो जगह आवंटित कराई गई थी उसकी लाखों रुपये कीमत में बिक्री का सौदा कराने के भी आरोप लगे हैं। यह जगह सीईओ प्रसाद चव्हाण से आवंटित कराई गई थी।

कार्यकर्ताओं की अनदेखी

अपने करीबी अधिवक्ताओं को कैंट बोर्ड में बतौर केसों की पैरवी के लिए एडजेस्ट कराने के भी आरोप हैं। सबसे गंभीर आरोप कार्यकर्ताओं की ओर से अनदेखी किए जाने के हैं। इन आरोपों की अनदेखी रिटर्न टिकट की पैरवी करने वाले भी नहीं कर सकते।

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