- शहर के फ्लाईओवर और डिवाइडर से नहीं हटाई जा रहे धूल के ढेर
- शहर में सांस के रोगी बढ़ रहे, कोरोना में खतरनाक वायु प्रदूषण
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर में कोरोना कम होने का नाम नहीं ले रहा है और नगर निगम इससे पूरी तरह से बेखबर बना हुआ है। वायु प्रदूषण को रोकने के लिये सख्त कानून बनाए गए हैं और दोषी इकाइयों के खिलाफ जुर्माना भी लगाया जा रहा है, लेकिन शहर के डिवाइडरों और फ्लाईओवरों पर धूल का अंबार लगा हुआ है जो वाहनों के कारण उड़ कर लोगों के फेफड़ों में समा रही है और लोगों को बीमार करने में लगी हुई है। वायु प्रदूषण भी कोरोना को बढ़ाने में अहम् रोल अदा कर रहा है और नगर निगम की यह लापरवाही लोगों के लिये भारी पड़ रही है।
शहर के मलियाना फ्लाईओवर, परतापुर फ्लाईओवर और मेवला फ्लाईओवर पर धूल लगातार बढ़ रही है। नगर निगम के सफाई कर्मचारी 10-15 दिन में एक बार खानापूर्ति करने के लिये धूल उठाने के लिये आते हैं। शहर की सभी सड़कें इस रोग से ग्रसित हैं और सफाई कर्मचारी अपनी मर्जी के मुताबिक काम करते है।
दरअसल स्थिति इस कदर खराब है कि परतापुर से लेकर बेगमपुल और एल ब्लॉक से लेकर बेगमपुल तथा काली नदी से लेकर बेगमपुल तक की सड़कों के दोनों तरफ धूल ही धूल भरी हुई है। तेज गति से आने वाले वाहनों के कारण यह धूल उड़कर वातावरण में उड़ती रहती है और लोगों के सांसों में समाकर फेफड़ों में स्थायी घर बनाती जा रही है।
सफाई कर्मचारियों का आलम यह है कि सड़क पर जमी धूल को हटाकर सड़क पर ही छोड़ देते हैं जो वाहनों के कारण फिर पुरानी जगह पर आ जाती है। प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल में सांस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मेडिसिन विभाग में रोज पन्द्रह से बीस मरीज सांस के आ रहे है।
जुलाई से सितंबर माह तक सांस की बीमारी के 590 मरीज आए। इनमें काफी संख्या में लोग वायु प्रदूषण के कारण उड़ रही धूल से परेशान थे। मेडिकल कालेज में मेडिसिन विभाग में ऐसे रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वरिष्ठ फिजिशियन डा. तनुराज सिरोही का कहना है कि धूल के कारण इंसान के फेफड़ों में संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है और धीरे-धीरे गंभीर बीमारी घर कर लेती है।
अगर नियमित रुप से सड़कों से धूल हटती रहे तो काफी हद तक सांस की बीमारी से बचा जा सकता है और वायु प्रदूषण कम होने से इंसान स्वस्थ भी रहेगा। सीएमओ डा. राज कुमार का कहना है कि वायु प्रदूषण बढ़ने से सीधे तौर पर इंसान की श्वसन प्रणाली पर फर्क पड़ता है और सांस की बीमारी के अलावा कई अन्य बीमारियां भी लग जाती है।

