Monday, March 30, 2026
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UP: अखिलेश यादव ने दादरी में चुनावी मोर्चा संभाला, गुर्जर कार्ड खेला, राजा मिहिर की प्रतिमा लगाने का किया वादा

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मिशन 2027 के लिए चुनावी रणभूमि में उतर चुके हैं। उन्होंने यूपी के दादरी में की गई अपनी रैली में खुलकर गुर्जर कार्ड चला। गुर्जर समाज के सम्मान के प्रतीकों को अपने भाषण में जहां पूरी तरजीह दी, वहीं सरकार बनने पर राजधानी लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट पर राजा मिहिर भोज की प्रतिमा स्थापित करने का वादा भी किया।

गुर्जर प्रतिहार वंश के 9वीं शताब्दी के शासक मिहिर भोज ने उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से में शासन किया। वे भगवान विष्णु के प्रति अपनी भक्ति के लिए भी इतिहास में दर्ज हैं। भाजपा नेता प्राय: अखिलेश यादव पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाते हैं। शायद यही वजह रही कि दादरी की रैली की शुरुआत अखिलेश ने गुर्जर-प्रतिहार वंश के राजा मिहिर भोज की प्रतिमा पर गंगा जल चढ़ाकर की।

कुछ लोग सम्राट मिहिर भोज की विरासत छीन लेना चाहते थे

अखिलेश ने समाजवादी सरकार बनने पर महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये दिए जाने की बात दोहराकर आधी आबादी को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। साथ ही कहा कि कुछ लोग हमारे सम्राट (मिहिर भोज) की विरासत भी छीन लेना चाहते थे।

बता दें कि, दादरी और आसपास के क्षेत्रों में मिहिर भोज की विरासत होने का दावा गुर्जर और राजपूत दोनों ही जातियां करती रही हैं। सपा अध्यक्ष ने याद दिलाया कि समाजवादी सरकार में मिहिर भोज के नाम से बड़ा पार्क बनाया था। 1857 की जंग में कोतवाल धन सिंह गुर्जर के योगदान को याद करके सजातीय समाज को लुभाने की कोशिश की।

80-90 सीटों पर गुर्जर समाज का अच्छा दखल माना जाता है

पश्चिम यूपी की कैराना, सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ, गौतमबुद्धनगर, बागपत, बिजनौर व अमरोहा में कभी न कभी गुर्जर समाज से सांसद रह चुके हैं। पश्चिमी यूपी की 80-90 सीटों पर इस समाज का अच्छा दखल माना जाता है। यह यूं ही नहीं है कि आजाद समाज पार्टी के नेता और नगीना से सांसद चंद्रशेखर भी संसद में गुर्जर रेजीमेंट बनाने की मांग उठा चुके हैं। अब दादरी की रैली के सहारे गुर्जर कार्ड का फल पाने में अखिलेश यादव कितना सफल होते हैं, यह तो 2027 के परिणाम ही बताएंगे।

उधर, बीते लोकसभा चुनाव में सपा के लिए ट्रंप कार्ड बना संविधान का मुद्दा भी अखिलेश ने जोरशोर से उठाकर संदेश दिया कि इस मुद्दे को आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान भी ठंडा नहीं पड़ने दिया जाएगा।

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