- मेडा परिसर में तैयार हुई चौपला नाम की आर्ट गैलरी
- क्रांतिधरा से शुरू हुए आजादी के आंदोलन की यादें संजोकर रखी गई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) में तैयार की गई चौपला नाम की आर्ट गैलरी गवाह बन रही है क्रांतिधरा से जुड़ी यादों की। गैलरी में 1857 की यादों के साथ उन वीरों के चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है, जिन्होंने आजादी के लिए अपनी कुर्बानियां दी थी। यह गैलरी उस जगह बनाई गई है,
जिसमें कभी कबाड़ भरा रहता था और पूरा क्षेत्र गंदा रहता था, लेकिन प्राधिकरण उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय की पहल आखिर रंग लाई। मेडा ने यह शानदार आर्ट गैलरी तैयार की है, जिसमें 150 से ज्यादा चित्र प्रदर्शनी में प्रदर्शित किये गए हैं।
गुरुवार को चौपला नामक आर्ट गैलरी का उद्घाटन बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूली बच्चों द्वारा किया गया। इस दौरान एमएलसी धमेन्द्र भारद्वाज व वीसी मेडा अभिषेक पांड्ेय भी मौजूद रहे। स्कूली बच्चों को देश की आजादी के लिए मेरठ से चले सन् 1857 के विद्रोह के बारे में चित्रों द्वारा जानकारी दी गई। इस दौरान बच्चों ने आजादी के आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले देश भक्तों के बारे में भी जाना।

मेरठ विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए आर्ट गैलरी (चौपला) नाम के संग्राहलय की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। मेडा की जिस बिल्डिंग में पहले कचरा होता था, उस कचरे को 25 लाख में बेचनें के बाद केवल 18 लाख में यह गैलरी तैयार की गई है। इससे न केवल मेडा को आर्थिक लाभ हुआ, बल्कि गैलरी से हमारे धर्म व संस्कृति की भी पहचान बढ़ी है। एमएलसी ने कहा प्रदर्शनी का उद्घाटन किसी जनप्रतिनिधि द्वारा कराया जा सकता था, लेकिन वीसी ने स्कूली बच्चों को इसके लिए चुना जो काफी सराहनीय है।

यह बताता है कि पीएम का जो संदेश है कि कोई भी वीआईपी कल्चर नहीं रहेगा। यह उसका अनुसरण है। इसका काफी फायदा बच्चों को होगा। वीसी एमडीए ने बताया चौपला आर्ट गैलरी के निर्माण में तीन माह का समय लगा है। गैलरी में मेरठ से जुड़ी सभी यादों को ताजा रखने का प्रयास किया गया है। साथ ही यह प्रयास है उन युवाओं व प्रतिभाओं को एक मंच मिल सके, जिनमें प्रतिभाएं हैं।
क्यों दिया चौपला नाम?
वीसी ने बताया पश्चिम उप्र में किसी भी चौराहे को चौपला कहा जाता है और चौपले पर पूरे शहर की मनोरंजक व उपलब्धि भरी चर्चाएं होती है इसलिए इसका नाम चौपला दिया गया है। चौपला नाम से आर्ट गैलरी मेरठ की पहचान का प्रतीक बन सकती है, इस नाम से यहां आने पर पहले से ही पता चलेगा कि अंदर क्या होगा। इससे हर तरह के लोग यहां आकर शहर के बारे में चर्चा कर सकेंगे।
11 हजार फीट में बनी है आर्ट गैलरी
एमडीए के जिस बेसमेंट में पहले कबाड़ भरा रहता था। उसका क्षेत्रफल ग्यारह हजार स्क्वायर फीट है, लेकिन इसमें अब कबाड़ की जगह अपने शहर से जुड़ी महत्वपूर्ण यादों को संग्रहित किया गया है। मेडा की अपने शहर का सौंदर्यकरण करनें की जिम्मेदारी है, जिसकी शुरूआत विभाग के कार्यालय से ही की गई है। आने वाले समय में वेदव्यासपुरी में क्रांतिधरा पार्क तैयार करने की योजना है। इसी के साथ शहर में इटिंग ज्वाइंट योजना पर भी काम किया जा रहा है। जिससे ज्यादा से ज्यादा आम लोग एक जगह इकट्ठा हो सके।

