जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल सोमवार को शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे, जहां उन्होंने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत में अपना पक्ष स्वयं रखा।
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू भी मौजूद रहे।
अदालत में केजरीवाल का पक्ष
सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा, “मैं निजी तौर पर न्यायमूर्ति और न्यायालय की इज्जत करता हूं।” इस पर बेंच ने जवाब दिया कि “सम्मान पारस्परिक है, आप मुद्दे पर केंद्रित रहें।”
केजरीवाल ने आगे कहा कि वह एक आरोपी के रूप में अदालत में खड़े हैं, जबकि ट्रायल कोर्ट उन्हें बरी कर चुका है। इस पर अदालत ने उन्हें जज के रिक्यूजल (हटाने) से जुड़े मुद्दे पर ही अपनी दलील रखने को कहा।
वकील की मौजूदगी पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी नोट किया कि एक वकील केजरीवाल की सहायता कर रहा है। इस पर बेंच ने स्पष्ट किया कि जब केजरीवाल स्वयं कह चुके हैं कि उन्होंने किसी वकील को नियुक्त नहीं किया है, तो कोई भी प्रॉक्सी के रूप में पेश नहीं हो सकता।
जज पर उठाए सवाल
केजरीवाल ने अपनी दलील में कहा कि 9 मार्च को ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर बिना प्रतिवादियों की मौजूदगी के आदेश पारित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 40,000 पन्नों से अधिक की चार्जशीट का अध्ययन किए बिना अदालत ने टिप्पणी कर दी कि आदेश में खामियां हैं।
उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि जज वास्तव में पक्षपाती हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका है। इस संदर्भ में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अपनी आशंकाएं व्यक्त कीं।
सीबीआई का विरोध
पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की अर्जी का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि “अदालत कोई नाटक का मंच नहीं है।” उन्होंने आरोपों को तुच्छ और अवमाननापूर्ण बताया था।
निचली अदालत का फैसला और आगे की कार्रवाई
इस मामले में 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल,मनीष सिसोदिया समेत 21 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था और सीबीआई की जांच पर सवाल उठाए थे।
इसके बाद 9 मार्च को हाईकोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया। वहीं, मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय ने जज हटाने की मांग को खारिज करते हुए कहा था कि इस पर फैसला संबंधित जज को ही लेना होगा।
निष्पक्ष सुनवाई पर उठे सवाल
11 मार्च को केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने आशंका जताई थी कि मामले की सुनवाई निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही है। फिलहाल, इस मामले में अदालत में सुनवाई जारी है और आगे के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।

