- चुनाव में अपनाये जा रहे तमाम तरह के हथकंडे, दावे-वादे हो रहे खूब
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पिता की राजनीतिक विरासत को ‘बरकरार’ रखने के लिए कई दिग्गज दिन रात एक किये हुए हैं। चुनाव में तमाम तरह के हथकंडे अपनाये जा रहे हैं। दावे और वादे भी खूब किये जा रहे हैं। ये तमाम दिग्गज अपने पिता की राजनीतिक विरासत को कायम रख पाते हैं या फिर नहीं, यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन इतना अवश्य है कि इनके चुनावी क्षेत्र में चुनाव बेहद रोमांचक बना हुआ हैं। कैराना सीट तो एक तरह से हॉट सीट बन गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कैराना को लेकर तंज कसे हैं, जिसके बाद कैराना पर सभी की निगाहें लग गई हैं।

दरअसल, कैराना विधानसभा सीट मुन्नवर हसन की राजनीतिक विरासत रही हैं। इस सीट से पहली बार नाहिद हसन 2014 में उप चुनाव जीते थे। 2017 में विधायक बने और अब तीसरी बार सपा प्रत्याशी के रूप में नाहिद चुनाव मैदान में हैं। हालांकि नाहिद हसन जेल में बंद हैं। जेल से ही चुनाव लड़ रहे हैं। उनका चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी उनकी बहन इकरा संभाले हुए हैं।

इसी सीट पर बाबू हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। मृगांका सिंह भी राजनीतिक विरासत की लड़ाई लड़ रही हैं। हुकुम सिंह कैबिनेट मंत्री रहे हैं। उनकी मृत्यु के बाद मृगांका सिंह 2017 में चुनाव लड़ी, तब हार गई थी। अब 2018 में उप चुनाव लड़ा, तब भी हारी। तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं। कैराना से मुन्नवर हसन और हुकुम सिंह का परिवार फिर से आमने-सामने हैं।

इस तरह से बागपत में भी नवाब कोकब हमीद का पुत्र अहमद हमीद भी राजनीतिक विरासत को लेकर चुनावी दंगल में हाथ आजमा रहे हैं। अहमद हमीद रालोद के सिंबल पर इस बार चुनाव मैदान में हैं। पिछली बार अहमद हमीद बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा था, जिसमें हार गए थे। बागपत का चुनाव भी बेहद रोमांचक होने वाला हैं। अहमद हमीद की लड़ाई भाजपा के योगेश धामा के साथ है।

