Friday, February 20, 2026
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अप्रैल में दिख रही खगोलीय घटना

  • 100 साल बाद लगने वाले दुर्लभ सूर्य ग्रहण के लिए दीपक शर्मा जाएंगे पूर्वी तिमोर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: 20 अप्रैल को होने वाली दुर्लभ खगोलिय घटना जो 100 साल बाद हो रहीं हैं यह पूरी धरती की आबादी की मात्र 9 प्रतिशत है, जो इस ग्रह को देख पाएगी। यह हाइब्रिड ग्रहण आॅस्ट्रेलिया, पूर्वी तिमोर और इंडोनेशिया के मनोक्वारी वाले हिस्से मे ही दिखाई देगा।

इक्लिप्स टास्क फोर्स के गतिविधि प्रभारी सदस्य फर्नांडा बोर्जेस ने दुनिया भर से जुट रहे युवाओ को ग्रहण के दौरान की जाने वाली गतिविधियो के प्रशिक्षण के लिए भारत से दीपक शर्मा को आमंत्रित किया है। बता दें कि साल 2023 का पहला सूर्य ग्रहण गुरुवार 20 अप्रैल को लगेगा जो कि बेहद अद्भुत होगा।

इसमें एक ही दिन तीन तरह के सूर्य ग्रहण दिखेंगे इसे निंगालू या संकर सूर्य ग्रहण भी कहा जाता है। खास बात यह है कि 20 अप्रैल को लगने वाले सूर्य ग्रहण में एक ही दिन तीन तरह के सूर्य ग्रहण दिखाई पड़ेंगे। इसे वैज्ञानिक द्वारा हाइब्रिड सूर्य ग्रहण कहा गया है।

क्या है हाईब्रिड सूर्य ग्रहण?

हाईब्रिड सूर्य ग्रहण वह होता है जिसमें सूर्य ग्रहण आंशिक पूर्ण और कुंडलाकार का मिश्रण होता है ऐसा ग्रहण 100 साल में एक बार लगता है। इसमें सूर्य ग्रहण के समय चंद्रमा की धरती से न तो ज्यादा दूरी होती है और न ही कम् इस अद्भुत सूर्य ग्रहण में कुछ सेकंड के लिए एक वलय रिंग जैसी आकृति बनती है। इसे अग्नि का वलय या रिंग आॅफ फायर भी कहा जाता है।

सूर्य ग्रहण का समय भारत के अनुसार

सूर्य ग्रहण गुरुवार 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 4 पर लगेगा और दोहर 12 बजकर 29 पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा। ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 24 मिनट होगी। हालांकि इस ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा। इस ग्रहण को अंटार्कटिका, थाईलैंड, चीन, बरूनी, सोलोमन, फिलीपींस, ताइवान, पापुआ, न्यू गिनी, इंडोनेशिया, आॅस्ट्रेलिया पूर्व और दक्षिण एशिया, प्रशांत महासागर, अंटार्कटिका और हिंद महासागर से देखा जा सकेगा।

एक ही दिन दिखेंगे 3 तरह के दुर्लभ सूर्य ग्रहण

साल 2023 का पहला सूर्य ग्रहण बहुत ही खास और दुर्लभ होगाण् इसमें एक ही दिन 3 तरह के सूर्य ग्रहण दिखाई देंगे। यानी सूर्य ग्रहण को तीन रूपों आंशिक पूर्ण और कुंडलाकार में देखा जा सकेगा। आंशिक सूर्य ग्रहण चंद्रमा जब सूर्य के किसी छोटे हिस्से के सामने आकर उसे रोकता है तो इसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

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कुंडलाकार सूर्य ग्रहण चंद्रमा जब सूर्य के ठीक बीच में आकर उसके रोशनी को रोक देता है तो सूर्य के चारों तरफ एक चमकदार रोशनी का गोला बनता है। इसे ही अग्नि का वलय कहा जाता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा जब एक सीधी रेखा में होते हैं तब पृथ्वी के एक भाग में पूरी तरह से अंधेरा छा जाता है और ऐसे में पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है पूर्ण सूर्य ग्रहण को खुली आंखों से देखने पर नुकसान भी हो सकता है।

हर 10 साल में एक बार आता हैं ग्रहण

20 अप्रैल को चंद्रमा सूर्य के चेहरे को पार कर जाएगा और यह सूर्य ग्रहण आॅस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया से होकर गुजरेगा। इस पथ के दोनों छोर पर, पृथ्वी की वक्रता चंद्रमा और प्रेक्षक के बीच की दूरी को बढ़ा देती है। चंद्रमा तब बहुत छोटा होता है जो सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है। परिणामस्वरूप इन स्थानों में (जो समुद्र के ऊपर हैं ) ग्रहण कुंडलाकार दिखाई देगा। यह थोड़ा असामान्य है, लेकिन विशेष रूप से दुर्लभ नहीं है। आखिरी बार नवंबर 2013 में हुआ था अगला नवंबर 2031 में होगा।

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