
देश में ऐसा गठजोड़ पैदा हो गया है, जो सिर्फ देश के चंद पूंजीपति घरानों की धन-दौलत बढ़ाने का ही काम कर रहा है। देश और समाज बहुत बडे संकट के दौर से गुजर रहा है। हिंदुस्तान की संस्कृति विविधतापूर्ण, साझी और मिली जुली रही है। हमारे यहां बाहर से कई जातियां-जैसे हूण, शक, कुषाण, मंगोल, पठान, तुर्क, यूनानी आदि जातियों के लोग आए और यहां की संस्कृति, आचार विचार और चिंतन से प्रभावित हुए, यहां की संस्कृति और चिंतन को प्रभावित किया और कालांतर में वे सब यहां की संस्कृति में रच बस गए। दोनों ने एक-दूसरे से काफी कुछ सीखा, लेकिन पिछले काफी अरसे से सांप्रदायिक ताकतें इस साझी संस्कृति और साझी विरासत पर सबसे ज्यादा हमले कर रही हैं।