सावन के महीने में सांप भू गर्भ से निकलकर भू तल पर आ जाते हैं। माना जाता है कि नाग किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचाएं, इसलिए नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को बिहार, बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान आदि स्थानों पर नाग देवता की पूजा की जाती है। वहीं, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देश के अन्य राज्यों में नाग पंचमी मनाई जाती है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, नाग देवता स्वयं पंचमी तिथि के स्वामी हैं। ऐसे में इस दिन उनकी पूजा करने से भक्तों की हर मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती हैं। नाग पंचमी को अनदेखा न करें।
पं. पूरन चंन्द जोशी
नाग पंचमी 29 जुलाई मंगलवार को है। हिंदू धर्म में नाग पंचमी का विशेष महत्व है। यह त्योहार श्रावण मास में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से दुख दूर होते हैं और आर्थिक स्थिति सुधरती है। इस साल नाग पंचमी पर शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे यह दिन बेहद खास रहने वाला है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। वहीं, कुछ जगहों पर नाग पंचमी सावन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर भी मनाई जाती है। इस दिन लोग नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करते हैं। ऐसा करने से बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से जीवन के दुखों से निजात मिल सकती है और आर्थिक तंगी भी दूर होती है। नाग देवता को भगवान शिव का गण भी माना जाता है। ऐसे में उनकी पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। और उनकी विशेष कृपा भक्तों पर बनी रहती है। वहीं, इस दिन बहुत शुभ संयोग बन रहा है, जिससे नाग पंचमी और खास रहेगी।
नाग पंचमी पर बन रहे शुभ योग
इस साल नाग पंचमी के दिन बहुत ही शुभ योग बन रहा है। जो इस दिन को और भी ज्यादा खास बना रहा है। इस शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली नाग पंचमी के दिन शिव योग बना रहा है। ऐसे में नाग देवता और भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।
सावन में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन ही यानी 27 तारीख सोमवार को हरियाली तीज मनाई जाएगी। इसके अलावा, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि इस सावन में 28 जुलाई दिन सोमवार को रात में 11 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो जाएगी। और इसका समापन 29 तारीख दिन मंगलवार को रात में 12 बजकर 47 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के मुताविक नाग पंचमी 29 तारीख को मनाई जाएगी।
पूजा की विधि
किसी नदी या तालाब या गंगा जी में स्नान करने के बाद आप को नए या धुले साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद, पास के शिवालय में जाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें और व्रत का संकल्प लें। अब अपने घर, रसोई और मंदिर के दरवाजे के दोनों ओर खड़िया से पुताई करके कोयले से नाग देवता का चिन्ह बना लें। अगर ऐसा संभव न हो, तो आप नाग देवता की तस्वीर का प्रयोग भी कर सकते हैं। फोटो लगाने के बाद घर में नाग देवता विधि-विधान से पूजा करें और फिर पास के खेत या ऐसे स्थान पर दूध का कटोरा रखकर आ जाएं जहां सांप आ सकते हैं। इस दिन सेवई और चावल बनाने का भी खास महत्व होता है। अब नाग देवताओं को दूध और जल से स्नान कराएं। साथ ही, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें। अब अंत में आरती करें और नाग पंचमी की कथा का पाठ भी अवश्य करें। इससे बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है।
नाग पंचमी का महत्व
सावन के महीने में सांप भू गर्भ से निकलकर भू तल पर आ जाते हैं। माना जाता है कि नाग किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचाएं, इसलिए नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को बिहार, बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान आदि स्थानों पर नाग देवता की पूजा की जाती है। वहीं, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देश के अन्य राज्यों में नाग पंचमी मनाई जाती है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, नाग देवता स्वयं पंचमी तिथि के स्वामी हैं। ऐसे में इस दिन उनकी पूजा करने से भक्तों की हर मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैऔर जीवन में सुख-समृद्धि आती हैं।
नाग पंचमी पर विधि-विधान से नाग देवता की पूजा करने से कुंडली में मौजूद राहु व केतु से जुड़े दोषों से मुक्ति मिल सकती है। नाग देवता को पाताल लोक का भी स्वामी बताया गया है। ऐसे में पंचमी तिथि के दिन भूमि की खुदाई भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। नाग पंचमी केवल सांपों की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ सामंजस्य और सहअस्तित्व का प्रतीक भी है। खासकर ग्रामीण और कृषि-आधारित समाज में इसे विशेष सम्मान के साथ मनाया जाता है। नाग देवता न केवल धरती की रक्षा करते हैं, बल्कि वर्षा और भूमि की उर्वरता से भी उनका गहरा संबंध है। यह पर्व हमें पर्यावरण के प्रति श्रद्धा और संवेदनशीलता का संदेश देता है।

