Wednesday, February 11, 2026
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Maha Shivratri 2026: शिवलिंग पर अर्पित करने से बचें ये 5 चीजें, वरना हो सकता है नुकसान

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। महाशिवरात्रि सिर्फ उपवास या पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का अद्वितीय उत्सव है। हिंदू धर्म में इस पर्व का गहरी आध्यात्मिक मान्यता है। 2026 में 15 फरवरी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन दुर्लभ और शक्तिशाली योगों का निर्माण हो रहा है, जो पूजा, तप, और भक्ति का फल कई गुना बढ़ा देते हैं। इसलिए यह शिवरात्रि विशेष रूप से फलदायी मानी जा रही है।

इस शुभ दिन पर शिव भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं, साथ ही कुछ विशिष्ट पूजन सामग्रियाँ अर्पित की जाती हैं, जिन्हें भगवान शिव अत्यंत प्रिय मानते हैं। हालांकि शास्त्रों में कुछ वस्तुएं ऐसी भी बताई गई हैं, जिन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना गया है।

शिव पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित

शिवलिंग की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना पूरी तरह से वर्जित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था और उसके शरीर से शंख उत्पन्न हुआ था। इस कारण से शिवलिंग पूजा में शंख का प्रयोग नहीं किया जाता। शास्त्रानुसार, जल, दूध, दही या अन्य पवित्र द्रव सीधे पात्र से शिवलिंग पर अर्पित करना ही सही माना गया है।

शिवलिंग की परिक्रमा

सामान्य देवी-देवताओं की मूर्तियों की पूरी परिक्रमा की जाती है, लेकिन शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा आधी ही की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिक्रमा करते समय जलाधारी या सोमसूत्र को पार नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे शिव की दिव्य ऊर्जा का प्रवाह माना जाता है। इसे सम्मान देने की आवश्यकता होती है।

हल्दी और श्रृंगार सामग्री से परहेज

भगवान शिव को तप, वैराग्य और साधना का प्रतीक माना जाता है। इसलिए शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित नहीं की जातीं। यदि माता पार्वती की पूजा हो रही हो, तो वहां इन सामग्रियों का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन शिवलिंग पर इन्हें नहीं चढ़ाना चाहिए।

बेलपत्र चढ़ाने की सही विधि

भगवान शिव को अर्पित सबसे महत्वपूर्ण सामग्री बेलपत्र है। शास्त्रों में यह बताया गया है कि महाशिवरात्रि के दिन केवल तीन पत्तों वाला अखंड और बिना कटे बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। बेलपत्र का चिकना और साफ हिस्सा हमेशा शिवलिंग की ओर होना चाहिए, क्योंकि इससे भगवान शिव को अत्यधिक प्रसन्नता होती है और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पूजन सामग्री से जुड़े विशेष नियम

शिवपुराण में स्पष्ट रूप से कुछ फूल और पत्तों के नाम दिए गए हैं, जिन्हें शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए। इनमें केतकी, कनेर, कमल और तुलसी के पत्ते शामिल हैं। इनकी जगह पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी के पत्ते अर्पित करना शुभ माना जाता है। ये सामग्री भगवान शिव को प्रिय मानी जाती है और पूजा में पूर्णता लाती है।

अक्षत (चावल) का नियम

महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर अर्पित अक्षत हमेशा साबुत और शुद्ध होना चाहिए। टूटी या खंडित चावल (खंडित अक्षत) अर्पित करना वर्जित है, क्योंकि इससे पूजा अधूरी मानी जाती है। शुद्ध और साबुत अक्षत पूजा की पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है और यह श्रद्धा का संकेत है।

इन सभी नियमों का पालन करके की गई शिव पूजा न केवल धार्मिक दृष्टि से सही मानी जाती है, बल्कि यह व्यक्ति को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करती है। महाशिवरात्रि के दिन इन नियमों के अनुसार पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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