Sunday, March 15, 2026
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शहर विधायक रफीक केस में जमानत पर सुनवाई आज

  • शहर विधायक अंसारी की बढ़ीं मुश्किलें

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर विधायक हाजी रफीक अंसारी केस में जमानत पर सुनवाई शुक्रवार को होगी। सपा समर्थक जहां अपने विधायक की जमानत कराने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, वहीं भाजपा नेता विधायक को जेल में लंबी अवधि तक रखे जाने की योजना बना रहे हैं। सपा से शहर विधायक रफीक अंसारी की जमानत याचिका बुधवार को जिला जज की कोर्ट में लगाई गई है। विधायक रफीक अंसारी के अधिवक्ता रोहिताश्व अग्रवाल की ओर से जमानत अर्जी दी गई और इस पर अब 31 मई यानि आज सुनवाई होनी है।

वहीं, दूसरी ओर शहर विधायक द्वारा वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जो शपथ पत्र दाखिल किया गया था, उसमें तथ्य छुपाने के प्रकरण में भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। मालूम हो कि विधायक रफीक अंसारी को मेरठ पुलिस ने बाराबंकी से तीन दिन पहले गिरफ्तार किया था। शहर विधायक कानूनी रूप से 26 साल से फरार थे और उनके 101 गिरफ्तारी वारंट जारी हुए थे। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट के सामने विधायक को पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया गया। इसके बाद से ही विधायक जेल में हैं।

दूसरी ओर विधायक के खिलाफ चुनाव आयोग को दी गई सूचना- शपथ पत्र में तथ्यों को छिपाने के संबंध में जो शिकायत भाजपाइयों ने एसपी सिटी को मंगलवार को दी थी, उस मामले में भी जांच शुरू हो गई है। पुलिस ने रफीक अंसारी का वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के समय दाखिल किया गया शपथ पत्र तलब किया है और आरोपों को लेकर जांच की जा रही है, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने चुनाव आयोग से शपथपत्र की मांगी जानकारी

शहर विधायक हाजी रफीक अंसारी द्वारा चुनाव के दौरान दिए गए शपथपत्र में झूठी जानकारी देने के भाजपा नेताओं के आरोप की पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इस मामले में पुलिस ने सीधे चुनाव आयोग से शपथ पत्र में दी गई जानकारी मांगी है। यदि शपथ पत्र में दी गई जानकारी अलग हुई तो शहर विधायक के आने वाले दिन मुश्किल भरे साबित होंगे।
गौरतलब है कि भाजपा के महानगर अध्यक्ष सुरेश जैन ऋतुराज व भाजपा के शहर विधायक प्रत्याशी कमलदत्त शर्मा ने समाजवादी पार्टी के शहर विधायक हाजी रफीक अंसारी पर चुनावों के दौरान झूठा शपथपत्र देने का आरोप लगाया था।

मामले को लेकर जांच कर रहे एसपी सिटी ने बताया कि जिस शपथपत्र में झूठी जानकारी देने की बात कही गई है। हमने चुनाव आयोग से उस शपथपत्र की कॉपी मांगी है। फिलहाल आचार संहिता लगी है। चार जून को लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद जैसे ही आचार संहिता समाप्त होगी चुनाव आयोग शपथपत्र की कॉपी उपलब्ध करा देगा। उसी के आधार पर यह पता चलेगा कि भाजपाइयों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। तभी आगे की कार्रवाई होगी।

सपा नेताओं के पुलिस पर दबाव में होने के आरोप

शहर विधायक की गिरफ्तारी पर सपा नेताओं के उग्र तेवर बने हुए हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर भाजपा नेताओं के दबाव में काम करने के आरोप जड़े हैं। सपा पार्षद दल के पूर्व नेता अफजाल सैफी ने आरोप लगाया कि पुलिस दबाव में काम कर रही है। सपा की लोकप्रियता से बौखलाकर दबाव बनाने के लिए ही यह ओछी हरकत की गई है, लेकिन शहर विधायक पाक-साफ होकर बाहर आयेंगे। यह सिर्फ दबाव बनाने की राजनीति है। लेकिन सपा नेता इससे न तो झुकेंगे और न ही दबाव में आयेंगे।

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