- 5.10 लाख प्रतिदिन की दर से वाहनों से की जाएगी एंट्री फीस की वसूली
- सेटिंग-गेटिंग के चलते बोर्ड के अफसरों और सदस्यों की ठेकेदार से बनी सहमति
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: माह दिसंबर से कैंट बोर्ड के टोल नॉकों से होकर गुजरने वाले वाहन चालक बड़ी लूट के लिए खुद को तैयार रखे। डंपर सरीखे जिन भारी वाहनों से प्रति फेरा 500 रुपये तक वसूली की जा रही है, उनको अब अधिक रकम देनी होगी। माना जा रहा है कि भारी वाहनों से प्रति फेरा 100 रुपये तक वृद्धि की जा सकती है। यदि ऐसा हुआ तो इसका बोझ भी आम आदमी की जेब पर ही पड़ने जा रहा है।
5.10 लाख रुपये प्रतिदिन की दर से प्रस्तावित टोल ठेके को लेकर बोर्ड के अफसरों व सदस्यों की ठेकेदार के बीच बातचीत तय हो गयी है। इतने भारी भरकम ठेके के लिए जिन गैर सरकारी प्रक्रियाओं से गुजरना अब भ्रष्टाचार के बजाय सिस्टम मे रिवाज हो गया है, उनको भी फाइनल टच दिया जा चुका है, केवल बोर्ड बैठक का इंतजार किया जा रहा है।
टोल ठेके में मिलने वाली मोटी मलाई के चक्कर में कैंट बोर्ड के कुछ सदस्यों के उतावलेपन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रसाद चव्हाण के कार्यकाल में ही टोल ठेके की फाइल को ओके कराना चाहते थे। उनकी ओर से इसके लिए बोर्ड बैठक का इंतजार किए बगैर ही सर्कुलर एजेंडा भेजकर सभी बोर्ड सदस्यों के साइन कराने का प्रस्ताव था, लेकिन ऐन मौके पर प्रसाद चव्हाण पलट गए।
कोर्ट से दहशत में थे अफसर
जानकारों की मानें तो टोल ठेके के चक्कर में दो बार अवमानना की कार्रवाई के चलते जेल जाने की नौबत आने के बाद कैंट बोर्ड के अफसर दहशत में थे। जिसके चलते सरकुलर एजेंडा के जरिये टोल का ठेका फाइलन किए जाने से कदम खींच लिए गए। पब्लिक व भाजपा के विरोध के चलते कैंट बोर्ड की बैठक में लिए गए फैसले के खिलाफ ठेकेदार हाईकोर्ट में चला गया था।
जिसके चलते हाईकोर्ट ने कैंट बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष व सीईओ के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई कर दी। कैंट बोर्ड के दोनों बडेÞ अफसरों ने कोर्ट में सॉरी बोल कर किसी प्रकार अपनी जान बचायी। इसके बाद एक अन्य मामले में सीईओ को आनन-फानन में यहां से माफीनामा भेजकर किसी प्रकार खुद को अवमानना की सजा से बचाया। इन दो घटनाओं के बाद से प्रसाद चव्हाण टोल ठेके की फाइलों से कन्नी काटने लगे थे।
टोल वृद्धि से भाड़ा महंगा
टोल पर संभावित वृद्धि से भाड़ा भी महंगा होगा। यदि भाड़ा महंगा होगा तो इसका सीधा असर चीजों की महंगाई पर होगा। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन मेरठ के अध्यक्ष गौरव शर्मा का कहना है कि डीजल के दामों में बढ़ोतरी की वजह से एक तो पहले से ही काम धंधा नहीं है। टोल से गुजरने वाले वाहनों यदि इसका और ज्यादा बोझ डाला गया तो उसका असर काम धंधे पर भी पड़ना तय है।
अन्य सदस्यों ने साधी चुप्पी
वहीं, दूसरी ओर जनता व कैंट विधायक की नाराजगी के सवाल पर बोर्ड के अन्य सभासद इस मामले में पर चुप्पी साधे हुए हैं। इसको लेकर उनका बस इतना कहना है कि बोर्ड बैठक में जो हालात बनेंगे उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
कैंट विधायक पर टिकी उम्मीदें
टोल वृद्धि को लेकर अब सभी की उम्मीद भाजपा के कैंट विधायक पर टिकी हुई हैं। तमाम लोग चाहते हैं कि पीडब्ल्यूडी की जिन तीन सड़कों मवाना रोड, दिल्ली रोड और रुड़की रोड कैंट बोर्ड अवैध टोल वसूली करा रहा है उनको बंद किया जाना चाहिए। हालांकि विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल कह चुके हैं कि पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर टोल वसूली नहीं करने दी जाएगी। इस संबंध में उन्होंने जीओसी इन चीफ मध्य कमान व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन तथा पीडब्ल्यूडी के अधीशासी अभियंता के सीईओ कैंट को भेजे पत्र का भी हवाला दिया।
सदस्य न फेर दे विधायक की कोशिशों पर पानी
इस पूरे मामले में कैंट बोर्ड के सदस्यों द्वारा विधायक के प्रयासों पर पानी फेर दिए जाने की आशंका जतायी जा रही है। दरअसल इस प्रकार की आशंका अकारण नहीं। पूर्व भी टोल ठेकेदार से हमदर्दी रखने वाले बोर्ड के सदस्य ऐसा कर चुके हैं। अन्यथा सांसद व विधायक के प्रबल विरोध के चलते कैंट अफसर तो टोल के मुद्दे पर घुटनों पर आ चुके थे।
ये कहना है विधायक का
कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल का कहना है कि बोर्ड की आगामी बैठक जिसमें टोल पर निर्णय लिया जाना है वह स्वयं भी मौजूद रहेंगे। पीडब्ल्यूडी की सड़क पर टोल वसूली नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए कृत संकल्प हैं
ये कहना है मंजू गोयल का
वार्ड छह की सदस्य मंजू गोयल का कहना है कि 20 करोड़ के राजस्व की बात तो ठीक है, लेकिन जहां तक टोल की बात है तो इस संबंध में संगठन की ओर से जो भी निर्देश दिया जाएगा, बोर्ड में उसके अनुसार आचरण करेंगी।
ये कहना है मुकेश सिंहल का
महानगर भाजपाध्यक्ष मुकेश सिंहल का कहना है कि विकास के लिए धन की जरूरत है, लेकिन यह जनसुविधा की कीमत पर संभव नहीं है। इस संबंध में अन्य लोगों से विचार कर निर्णय लिया जाएगा। जनता के हित की अनदेखी उचित नहीं है।

