- चर्च परिसर के बाहर लगे मेले में पर्यटकों ने उठाया लुत्फ, माता मरियम के आगे शीश नवाकर मांगी मन्नतें
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: शनिवार को क्रिसमस-डे के अवसर पर सरधना के ऐतिहासिक चर्च में विशाल मेला लगाया गया। जिसमें दूरदराज से एक लाख से अधिक संख्या में पर्यटक पहुंचे। पर्यटकों ने मेले का जमकर लुत्फ उठाया, चर्च की सुंदरता को निहारते हुए माता मरियम की चमत्कारी तस्वीर के समक्ष शीश नवाकर मन्नतें भी मांगी। प्रभु यीशु के जन्म को दर्शाने वाली चरनी आकर्षण का केंद्र रही। हालांकि पर्याप्त पुलिस व्यवस्था नहीं होने के कारण चर्च प्रशासन को भीड़ संभालना भारी हो गया। देर शाम किसी तरह चर्च गेट बंद किया। इससे पूर्व चर्च में क्रिसमस के मौके पर सुबह के समय विशेष प्रार्थना का आयोजन किया।

शनिवार को चर्च में सुबह साढ़े आठ बजे विशेष प्रार्थना हुई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। मेले में सुबह से ही पर्यटकों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था जो देर शाम तक जारी रहा। इस बार मेले में अनुमान से अधिक भीड़ देखने को मिली। मेले में दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, पंजाब, हरियाणा आदि दूरदराज से करीब एक लाख से अधिक संख्या में पर्यटक पहुंचे। चर्च में लगी माता मरियम की चमत्कारी तस्वीर के दर्शन के लिए चर्च के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। हालांकि भीड़ को देखते हुए चर्च की इमारत को बंद रखा गया। श्रद्धालुओं ने माता मरियम की तस्वीर के समक्ष शीश नवाते हुए मन्नतें मांगी। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने चर्च की सुंदरता को निहारते हुए उसकी खूबसूरती को कैमरों भी खूबकैद किया। चर्च में बनाई गई सुंदर चरनी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। श्रद्धालुओं ने माता मरियम के समक्ष कैंडल जलाकर प्रार्थना की। हालांकि पर्याप्त पुलिस बल तैनात न होने के कारण चर्च प्रशासन को भीड़ संभालने में काफी पसीना बहाना पड़ा।

पार्किंग के नाम पर हुई अवैध वसूली
चर्च परिसर के बाहर लगने वाले मेल का नगर पालिका ने कोई ठेका नहंी छोड़ा। इसके बाद कुछ लोगों ने दुकानदारों अवैध वसूली की। इसके अलावा वाहन पार्किंग के नाम पर बाहर से आने वाले लोगों को खूब लूटा गया। वहीं, पार्किंग नहीं होने के कारण पर्यटकों को वाहन खड़े करने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क किनारे वाहन खड़े होने के कारण यहां जाम की स्थिति भी बनी रही।

बदइंतजामी ने बिगाड़ा खेल
क्रिसमस पर चर्च के बाहर इतना बड़ा मेला तो लग गया। मगर व्यवस्था के नाम पर कुछ नजर नहीं आया। छोटे-बड़े सभी वाहन चर्च तक पहुंच रहे थे। सड़कों पर कोई बैरिकेडिंग या चेक प्वाइंट नहीं बनाया गया। जिसके चलते भीड़ से हालात अधिक खराब रहे। हालांकि मामला बिगड़ने पर दोपहर को तहसील तिराहे पर पुलिस पिकैट तैनात की गई।

गिरजाघरों में हुई विशेष प्रार्थना
क्रिसमस का उल्लास शनिवार को सतरंगी छठा के साथ बिखरा। इस दौरान गिरजाघरों में सुबह से ही शिफ्टों में प्रार्थना सभाएं हुई और लोगों ने एक-दूसरे को क्रिसमस की बधाई दी। रुड़की रोड स्थित सेंट जोसेफ कैथ्रेडल में विशप फ्रासिंस कलिस्ट ने कहा कि प्रभु यीशु हमारा उद्धार करने के लिए आ गया है। फादर जॉन चिम्मन ने सभी को क्रिसमस की शुभकामनाएं दी। गिरजाघरों में धर्म गुरुओं ने बतिस्ता (बच्चों का नामकरण) की रीति भी निभाई। बच्चा पार्क स्थित सेंट थॉमस चर्च में मेरठ के डीन पादरी परितोष नोयल ने कहा कि भगवान यीशु बालक नहीं बल्कि हमारा उद्वारक है। हमें अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए उनकी शरण में जाना चाहिए। सेंट्रल मेथोडिस्ट चर्च लालकुर्ती में फादर चमन कंफर्ट में प्रार्थना सभा कराई गई। रेवरेंट कमलेश कंफर्ट ने प्रभु यीशु की जन्म की घटना का वृतांत सुनाया। सिटी मेथोडिस्ट चर्च में फादर इमानुएल मसीह ने कहा कि नन्हा फरिश्ता शांति का राजकुमार जन्म ले चुका है। ब्रदर ललित स्टीफन ने शांति का संदेश दिया। सेंट लुक चर्च में फादर राज ने प्रार्थना कराई और मिस्सा बलिदान पर प्रकाश डाला। गिरजाघरों में सुबह से ही उत्सव का माहौल रहा।

त्योहार मना किया खुशियों का इजहार
ऐसी मान्यता है कि प्रभु यीशु की जन्म की खुशी में ईसाई समुदाय के लोग क्रिसमस का त्योहार मनाकर अपनी खुशी जाहिर करते है। कहते है प्रभु यीशु का जन्म गोशाला में हुआ था। जिस तरह जन्माष्टमी पर घरों में श्री कृष्ण झांकी बनाई जाती है उसी तरह प्रभु यीशु की याद में कुछ लोग घरों में गोशाला बनाते हैं। इन झांकियों में यीशु की देखभाल करने वाले गड़रियों को भी दर्शाया जाता है।


