- 35 लाख की मशीन को नहीं मिला लाइसेंस
- जम्बो पैक के लिए ब्लड बैंक से मायूस लौट रहे मरीज
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिला अस्पताल में मरीजों को सस्ती दर पर ब्लड का जम्बो पैक उपलब्ध कराने के लिए 35 लाख की कीमत की ब्लड एफरेसिस मशीन एक माह से अधिक समय से धूल खा रही है। इसे चालू कराने के लिए अस्पताल के अधिकारी उदासीन बने हैं। एक माह से अधिक समय होने के बावजूद मशीन का लाइसेंस नहीं बन पाया। ऐसे में सस्ती दर पर जम्बो पैक लेने के लिए ब्लड बैंक पहुंच रहे मरीजों, तीमारदारों को मायूसी हाथ लग रही है।
गौरतलब है कि ब्लड कैंसर, थैलेसीमिया, डेंगू और एप्लास्ट एनीमिया के मरीजों की प्लेटलेट बहुत कम हो जाती हैं। उन्हें प्लेटलेट के जम्बो पैक की जरूरत होती है। प्लेटलेट का जम्बो पैक एक अत्याधुनिक ब्लड एफरेसिस मशीन से तैयार किया जाता है। इसके लिए ब्लड डोनर को एक बेड पर लिटाया जाता है और ब्लड एफरेसिस मशीन में किट लगा दी जाती है। इस मशीन के द्वारा डोनर के शरीर से लाल खून निकलता रहता है और उसमें से प्लेटलेट को अलग कर दिया जाता है और शेष रक्त को हाथों हाथ रक्तदाता के शरीर में वापस पहुंचा दिया जाता है।
इसकी किट की कीमत छह से सात हजार रुपये के बीच होती है। प्राइवेट ब्लड बैंकों में जम्बो पैक के लिए 15 से 20 हजार रुपये तक लेते हैं। गरीब लोग प्लेटलेट के जम्बो पैक लेने के लिए बेहद परेशान होते हैं। ब्लड कैंसर, एप्लास्ट एनीमिया और थैलेसीमिया के मरीजों को माह में एक या दो बार प्लेटलेट का जम्बो पैक चढ़वाने की जरूरत पड़ती है। इसी तरह कई बार डेंगू के गभीर मरीज को प्लेटलेट के कई जम्बो पैक चढ़ाने पड़ते हैं। आम लोगों के लिए प्लेटलेट का जम्बो पैक लेना बहुत महंगा है। यह सुविधा सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंकों में नहीं है।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में डेढ़ माह पूर्व जम्बो पैक बनाने वाली करीब 35 लाख की कीमत की ब्लड एफरेसिस मशीन मंगाई गई, लेकिन इसको चलाने के लिए फूड एवं ड्रग विभाग से लाइसेंस नहीं लिया जा सका। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डा. कौशलेन्द्र सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 35 लाख की कीमत की एफरेसिस मशीन तो गई, लेकिन इसका लाइसेंस जारी नहीं हुआ। इसी वजह से मशीन को चालू नहीं किया जा सका। लाइसेंस मिलते ही इस मशीन की सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। लाइसेंस जारी करने के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है।

