भारत में अब किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ अमेरिकन ब्लूबेरी जैसी हाई-वैल्यू फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं। ब्लूबेरी एक ऐसा फल है, जिसे दुनिया भर में सुपरफूड कहा जाता है। इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर हेल्थ-कॉन्शियस और फिटनेस पसंद लोगों के बीच।ब्लूबेरी उगाना उतना मुश्किल नहीं है जितना लोग समझते हैं।
क्यों ब्लूबेरी को सुपरफूड कहते हैं?
ब्लूबेरी एंटीआक्सीडेंट, विटामिन और मिनरल से भरपूर होती है। यह हार्ट हेल्थ, मेमोरी पॉवर, डायबिटीज कंट्रोल और इम्यून सिस्टम के लिए फायदेमंद मानी जाती है। इसी कारण भारत में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है और यह आयात पर निर्भर फल है।
खेती की तकनीक और जलवायु
जलवायु: भारत में 42 डिग्री तक तापमान पर भी इसकी खेती संभव है।
रोपण का समय: अप्रैल-मई सबसे उपयुक्त समय है।
फल आने का समय: पौधा लगाने के बाद लगभग 10 महीने में फल आना शुरू होता है और फरवरी-जून तक फसल ली जा सकती है।
सिंचाई: ड्रिप इरिगेशन सबसे अच्छा रहता है क्योंकि पौधों को नमी लगातार चाहिए।
छंटाई: बारिश के मौसम में पौधे की छंटाई करना जरूरी है ताकि अगले साल बेहतर उपज मिल सके।
उत्पादन और मुनाफा
एक एकड़ में करीब 3000 पौधे लगाए जा सकते हैं। चौथे साल तक प्रति पौधा लगभग 2 किलो उपज मिलती है। यानी कुल उत्पादन 6000 किलो होता है। यदि बाजार भाव 1000रुपये प्रति किलो रहा तो सालाना कमाई करीब 60 लाख रुपए तक हो सकती है। पांचवें साल से उपज और बढ़कर प्रति पौधा 5 किलो तक पहुंच सकती है।
लागत और निवेश
पौधे की कीमत: बाहर से मंगाए गए पौधे की कीमत लगभग 800 रुपये प्रति पौधा पड़ती है।
शुरूआती निवेश अधिक है लेकिन लंबे समय तक फायदा देता है। एक बार पौधा लगाने पर 10 साल तक लगातार उत्पादन मिलता है, जिससे हर साल कमाई बढ़ती जाती है।
मार्केटिंग और भविष्य
ब्लूबेरी का बाजार प्रीमियम है। बड़े शहरों के मॉल, सुपरमार्केट, होटल, रेस्टोरेंट और आॅनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसकी भारी मांग है। किसान यदि सही सप्लाई चैन से जुड़ जाएं तो उन्हें एक्सपोर्ट का भी अवसर मिल सकता है।

