- साथी अध्यापकों में दौड़ी शोक की लहर
जनवाणी टीम |
हस्तिनापुर/चांदपुर: नाव हादसे के दौरान गंगा नदी मे डूबे अध्यापक का शव गोताखोरों की टीम ने गहरे पानी से ढूंढ निकाला। शव मिलने का पता लगते ही साथी अध्यापकों में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को भीमकुंड के सामने गंगा नदी में नाव पलटने से कई लोग गायब हो गये थे। जिनमें हस्तिनापुर के रहने वाले अध्यापक महेश पाल भी शामिल थे।
अध्यापक महेश पाल विकास खंड जलीलपुर क्षेत्र के ग्राम हरिनगर के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत थे। मंगलवार को वह साथी अध्यापकों के साथ नाव में सवार होकर विद्यालय आ रहे थे जिस नाव में वह सवार हुए थे, उसमें 20 से अधिक यात्री सवार थे। वही कई दुपहिया वाहन भी लदे हुए थे। हिचकोले खाते हुए गंगा में चल रही ओवरलोड नाव पुल के पिलर से टकराकर पलट गई थी
जिसमें वह अपने साथी अध्यापकों व अन्य लोगों के साथ गंगा नदी में डूब गये थे। नाव हादसे के बाद स्थानीय गोताखोरों ने 15 लोगों को मौके से बचा लिया था। वहीं, उसके साथी तीन अध्यापक भी तैरकर गंगा नदी से बाहर आ गये थे। हादसे के बाद रेस्क्यू के लिए पीएसी मुरादाबाद से आई गोताखोरों के टीम के साथ ही एनडीआरएफ के जवानों को लगाया गया था। मंगलवार को रात होने पर रेस्क्यू टीम ने गंगा नदी में डूबे लोगों की तलाश बंद कर दी थी।

बुधवार की सुबह फिर से गंगा नदी में लापता हुए नाव हादसे के लोगों की तलाश शुरू कराई गई थी। दोपहर लगभग 12 बजे रेस्क्यू टीम को गंगा नदी में अध्यापक महेश पाल का शव मिला था। टीम जैसे ही शव निकालकर गंगा नदी से बाहर लाई वैसे ही वहां मौजूद उनके परिजनों में कोहराम मच गया। महेश पाल की मौत की खबर मिलते ही उनके साथी अध्यापकों मे शोक की लहर दौड गई। घटनास्थल पर मौजूद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अंत:परीक्षण के लिए मेरठ भेज दिया।
बंद रहा नावों का संचालन
गंगा नदी में हुए हादसे के अगले दिन गंगा नदी में नाव दिखाई नहीं दी। वही गंगा पार कर ड्यूटी पर आने वाला भी कोई दिखाई नही दिया। प्रशासन की सख्ती अगर पहले हो गई होती तो नाव हादसा नही होता। गंगा नदी में मंगलवार को हुए नाव हादसे में दो लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं, डेढ़ दर्जन लोगों की जान बमुश्किल बची है और अब भी गंगा नदी में कुछ लोगो के लापता होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के अगले दिन वहां पर नाव का संचालन होना तो दूर नाव भी दिखाई नहीं दी। प्रतिदिन गंगा नदी पार कर जलीलपुर क्षेत्र में ड्यूटी के लिए आना वाला कोई कर्मचारी भी तट पर दिखाई नहीं पड़ा। प्रशासन की सख्ती यदि पूर्व में हो गई होती तो मंगलवार को यह हादसा नहीं होता।
देर रात हुआ अंतिम संस्कार
मंगलवार को भीमकुंड पुल के समीप हुए नाव हादसे में जलीलपुर ब्लॉक में तैनात अध्यापक में चंद का शव एनडीआरएफ वे स्थानीय गोताखोरों बुधवार दोपहर स्वच्छ अभियान के तहत खोज निकाला। पुलिस ने शव को कब्जे में ले पीएम के लिए भेज दिया। पीएम के बाद देर शाम महेश का शव उनके आवास पर पहुंचा हाहाकार मच गया। थाना पुलिस के साथ एसडीएम मवाना अखिलेश यादव की उपस्थिति में प्राचीन गंगा नदी किनारे स्थित करण घाट पर महेश का विधि विधान पूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।
महेश के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। महेश के 28 वर्षीय पुत्र जहां शादीशुदा है, वहीं अन्य चार बच्चे अभी तक अविवाहित है। उधर, दो परिवारों के घर अंधेरा छा गया। महेश चंद ब्लॉक में शिक्षक के पद पर तैनात थे। उनके पिता पहले ही डाक विभाग से रिटायर हो चुके हैं।

महेश के पांच पुत्रों में 25 वर्षीय पुत्र रोहित हत्या के मामले में जेल में बंद है। वहीं, अन्य चारों पुत्र शिक्षा ले रहे हैं। परिवार में महेश के पिता व पत्नी बीमारी से पीड़ित होने के कारण महेश ने अपने पुत्र मोहित का कुछ वर्ष पूर्व वैवाहिक गठबंधन किया था। जबकि राहुल, सनकी 18 वर्षीय और 15 वर्षीय पुत्र काव्य अविवाहित है। जिनकी जिम्मेदारी एक बार फिर डाक विभाग से रिटायर महेश चंद के पिता बलवंत के कंधों पर आन पड़ी है।

