- इको फ्रेंडली होगा आरआरटीएस कॉरिडोर का पहला डिपो
- डिपो पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाए जाएंगे
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कहते हैं कि जब कोई वाहन दौड़ता है तो उससे प्रदूषण बढ़ता है। रैपिड के साथ ऐसा नहीं है, क्योंकि जब रैपिड दौड़ेगी तो प्रदूषण और घट जाएगा। दरअसल, रैपिड ट्रेन संचालन में भविष्य की जरुरतों को मद्देनजर रखते हुए उन्हें आधार बनाया गया है। बिजली की जरूरत को देखते हुए रैपिड बिजली भी पैदा करेगी और प्रदूषण की गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए भी रैपिड मददगार होगी। इसके लिए रैपिड के स्टेशनों को इको फ्रेंडली बनाने का काम जोरों पर है।

इसके मद्देनजर आरआरटीएस कॉरिडोर का पहला ही डिपो (दुहाई डिपो) पूरी तरह से इको फें्रडली होगा। यहां खुबसूरत हरियाली के साथ साथ वर्षा के जल को संचय करने के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी डेवेलप किया जा रहा है। इसके अलावा रैपिड अपने स्तर से ग्रीन ऊर्जा भी पैदा करेगी। रैपिड रेल प्रशासन के अनुसार 15 हेक्टेयर में विकसित हो रहे दुहाई डिपो में बारिश के पानी को एकत्र करने के लिए 22 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पिट्स बनाए जा रहे हैं ताकि भूमि के जलस्तर को बढ़ाया जा सके।
वर्षा के जल को अपशिष्ट पदार्थों को अलग करने के लिए इन पिट्स के साथ ही छन्नी युक्त डी सॉल्टिंग चैम्बर भी बनाए जा रहे हैं। डिपो के सभी ड्रेन को इन डी साल्टिंग चैम्बर से जोड़ा जाएगा। बारिश का पानी पहले ड्रेन के जरिए डी सॉल्टिंग चैम्बर में छन्नी से फिल्टर हो जाएगा और फिर स्वच्छ वर्षा जल रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पिट में पहुंचेगा।

रैपिड अधिकारियों के अनुसार ग्रीन ऊर्जा के उत्पादन के लिए डिपो के भवनों की छतों पर सौर पैनल लगाए जाएंगे। रैपिड रेल डिपो को हरा भरा रखने के लिए डिपो पर वृक्षों के साथ ही विभिन्न फल व फूलों के पौधे भी रोपे जा रहे हैं। इसी क्रम में दुहाई डिपो पर 200 पौधे लगाए गए हैं। इस प्रकार की ग्रीन बेल्ट की व्यवस्था रैपिड के सभी स्टेशनों पर की जाएगी।

