- वचन लेकर बच्चों का सेम और मैम श्रेणी में किया जा रहा विभाजन
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: कुपोषण की काली छापा मिटाने के लिए शासन की योजनाओं पर अमल किया जा रहा है। खासकर, बच्चों को लेकर संबंधित विभाग संजीदा हैं। इसी कड़ी में जनपद के प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर गत 21 तारीख से पोषण पखवाड़ा मनाया जा रहा है। चार अप्रैल तक गतिविधियां संचालित होंगी।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी ने बताया कि पोषण पखवाड़े में मुख्य फोकस बच्चों पर है। हर आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों का वजन लिया जा रहा है। बच्चों की ऊंचाई की नाप तथा बच्चों की उम्र के आधार पर उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। हां, अल्प वजन के बच्चों को सेम एवं मैम श्रेणी के बीच रखा जा रहा है। शासन द्वारा निर्धारित पोषण ट्रैकर एप पर सभी लाभार्थियों की फीडिंग की जानी है, ताकि बाद में उनका समुचित इलाज किया जा सके। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन समय सारणी के आधार पर गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं और उसे पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से तथा जनआंदोलन डेश बोर्ड पर भी भरा जा रहा है।
आशा त्रिपाठी ने बताया कि जनपद सहारनपुर में 0 से 5 साल तक के कुल 298000 बच्चे हैं। सभी का वजन लिया जाना है। इसके अतिरिक्त संबंधित संगठनों के माध्यम से जो छूटे हुए बच्चे हैं अथवा जिन क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केंद्र का सृजन नहीं है,उन बच्चों का भी वजन लेते हुए उनकी स्वास्थ्य की स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है।
मंगलवार को पोषण अभियान के अंतर्गत पोषण पखवाड़ा कार्यक्रम में समय सारणी के अनुरूप जनपद सहारनपुर के आंगनवाड़ी केंद्र जोगियान में अन्नप्राशन कार्यक्रम किया गया। इसमें दो बालक सोनू और विकास और 3 बालिकाएं क्रमश: सृष्टि, गुड्डी तथा वर्षा जिनकी आयु छह माह की हो चुकी है, उनका अन्नप्राशन किया गया। अन्नप्राशन कार्यक्रम में उनके माता-पिता, दादी इत्यादि उपस्थित रहे।
जनपद के प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में यह गतिविधि आयोजित की जा रही है। प्राप्त सूचना के अनुसार जनपद में 3221 बच्चों का अन्नप्राशन कार्यक्रम आज की तिथि में प्रत्येक विकास खंड और परियोजनाओं में कराया गया है। शहर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में अन्नप्राशन के समय बाल विकास परियोजना अधिकारी रचित गोयल तथा मुख्य सेविका श्रीमती रीता सैनी भी उपस्थित रहीं। जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी द्वारा जनमानस को संबोधित करते हुए यह बताया गया कि जब बच्चा 6 माह की आयु को प्राप्त कर लेता है तो उसको अतिरिक्त आहार की आवश्यकता होती है।
जो कि बच्चे की संतुलित वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि बच्चे को एक नियमित अंतराल में अपने दूध के साथ दलिया, हलवा, फलों की लुगदी बनाकर दें। इसको खाने से बच्चे स्वस्थ और प्रसन्न रहेंगे। अतिरिक्त आहार दिन में तीन से चार बार जरूर दिया जाए तो बच्चे की ग्रोथ उत्तरोत्तर और अच्छी होती है। जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा कई लाभार्थियों का वजन स्टेडियोमीटर और इन्फैंटोमीटर से लिया गया।

