- वार्ड आठ की तीन संपत्तियों के म्यूटेशन की रक्षा मंत्रालय के उच्च पदस्थ से शिकायत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: तमाम कायदे कानूनों को ताक पर रखकर कैंट बोर्ड सीएसी की बैठक में लिए जा रहे म्यूटेशन के मामलों को लेकर फौजी अफसरों की भूमिका व चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
वार्ड आठ के ऐसे ही तीन मामलों के म्यूटेशन की शिकायत रक्षा मंत्रालय के उच्च पदस्थ से की गयी है। इन तीनों ही मामलों में कैंट ऐक्ट के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा मामले की जांच की स्थिति में कई अफसरों के फंसने की आशंका जतायी जा रही है।
ये है पूरा मामला
संपत्तियों के म्यूटेशन के जिन मामलों का जिक्र किया जा रहा है, वो तीनों ही मामले इन साइड सिविल एरिया से संबंधित हैं तथा उपाध्यक्ष के वार्ड आठ से जुड़े हैं। इनको लेकर निकट भविष्य में कैंट बोर्ड कार्यालय में बड़े तूफान की आहट सुनाई दे रही है।
सीएसी की छह फरवरी की बैठक में स्वीकृति
सिविल एरिया कमेटी की विगत छह फरवरी 2020 को अध्यक्ष विपिन सोढ़ी की अध्यक्षता में हुई बैठक में उक्त संपत्तियों के म्यूटेशन की स्वीकृति दी गयी।
सीईओ की टिप्पणी के बाद भी बोर्ड की मोहर पर हैरानी
उक्त तीन संपत्तियों की मुटेशन को लेकर सीईओ कैंट प्रसाद चव्हाण की ओर से संबंधित पत्रावलियों पर असहमति की टिप्पणी अंकित की गयी है। हैरानी तो इस बात की है कि जब सीईओ कैंट जो सिविल एरिया कमेटी की बैठक में बतौर सचिव की हैसियत से बैठते हैं तथा उपाध्यक्ष सीएसी के अध्यक्ष होते हैं। ऐसे में यदि म्यूटेशन के किसी आवेदन पर पर सीएसी अध्यक्ष की स्वीकृति के बाद सीईओ उस पर असहमति अंकित करते हैं और बोर्ड से उक्त म्यूटेशन को पास कर दिया जाना वाकई हैरानी भरा है। इन्हीं तमाम बिंदुओं पर जांच की मांग रक्षा मंत्रालय से की गयी है।
बिग्रेडियर अर्जुन सिंह पर टिकी आस
सीएसी की बैठकों में म्यूटेशन के नाम पर चलने वाले खेल व घालमेल पर रोक के लिए अब कैंट के बाशिंदो की एक मात्र उम्मीद कैंट बोर्ड के नवागत अध्यक्ष बिग्रेडियर अर्जुन सिंह पर ही टिकी है। निहित कारणों के चलते सालों से म्यूटेशन के जो मामले सीएसी में आपसी राजनीति के चलते लटकाए हुए हैं, लोगों का कहना है कि ब्रिगेडियर अर्जुन सिंह से उम्मीद है कि सदस्यों की आपसी खींचातानी से पिस रही आम पब्लिक को राहत मिल सकेगी।
सीईओ की असहमति और सदस्यों का प्रबल विरोध
हैरानी तो इस बात की है कि उक्त सिविल एरिया कमेटी की बैठक में उक्त तीनों ही संपत्तियों के म्यूटेशन पर जहां सीईओ द्वारा असहमति की बात कही जा रही है। वहीं, दूसरी ओर तमाम सदस्यों ने भी उक्त म्यूटेशन का जमकर विरोध किया था। खासतौर से बोर्ड की महिला सदस्य बेहद मुखर रही थीं। तमाम विरोध के बाद भी म्यूटेशन पर मोहर और बोर्ड बैठक में उसको पास कर दिया जाना जानकारों का कहना है कि मामला जांच के दायरे में बनता है।
एक-दो नहीं, दर्जनों हैं ऐसे मामले
सीएसी की बैठक में म्यूटेशन के नाम पर जो खेल चलता है। उसके एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों मामले बताए जाते हैं। हैरानी तो इस बात की कि सीएसी की बैठक में होने घमासान का नुकसान कैंट बोर्ड की उस पब्लिक को उठाना पड़ता है। ऐसे ही कई मामले हैं जिनका म्यूटेशन सिर्फ इसलिए नहीं किया जाता क्योंकि आइटम विरोधी सदस्य की ओर से लगवाया जाता है।
सीईओ की असहमति बना मजाक
जिन तीन संपत्तियों का तमाम कायदे कानून ताक पर रखकर म्यूटेशन कर दिया गया है, उनको लेकर पत्रावली पर सीईओ कैंट की असहमति की आख्या अंकित है। हैरानी तो इस बात की है कि यदि सीईओ की तरफ से असहमति की आख्या अंकित की गयी है तो फिर बोर्ड ने कैसे म्यूटेशन को स्वीकृति दे दी। इसके लिए जितनी जिम्मेदार सीएसी हैं उससे ज्यादा जिम्मेदार बोर्ड में बैठने वाले तमाम अफसर भी हैं।
केस-एक
सीएसी की बैठक के एजेंडा के आईटम नंबर-191 में संपत्ति संख्या 59 करई गंज बीसी बाजार मेरठ कैंट का म्यूटेशन पूरन चौधरी के पक्ष में किया गया। इस केस में स्पष्ट सब डिविजन है। सब डिवीजन ही नहीं इस संपत्ति में सेना की जमीन पर अवैध कब्जा व अवैध निर्माण का मामला भी शामिल है। जबकि बकौल कैंट ऐक्ट यदि किसी संपत्ति में सब डिवीजन है या उद्देश्य परिवर्तन है अथवा अवैध निर्माण हो तो उसका म्यूटेशन नहीं किया जा सकता, लेकिन इस मामले में सब डिवीजन व अवैध निर्माण के अलावा सेना की भूमि पर कब्जा का भी मामला है। इसको लेकर फाइलों में आफिस रिपोर्ट भी मौजूद हैं। उसके बाद भी म्यूटेशन पर मोहर लग जाना वाकई हैरानी भरा है। इसको लेकर एक शिकायती पत्र जुलाई माह में कैंट बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष ब्रिगेडियर अनमोल सूद को भी भेजा गया था। यह बात अलग है कि कैंट ऐक्ट के उल्लंघन के इस मामले का न जाने किन कारणों के चलते संज्ञान नहीं लिया गया।
केस-दो
छह जुलाई 2020 को हुई सीएसी की बैठक के आइटम नंबर-192 के म्यूटेशन केस संपत्ति नंबर-106 जुबली गंज बीसी बाजार की सेल डीड की वैलिडिटी पर सवाल उठाए गए हैं। नो वैलिड डॉक्यूमेट की टिप्पणी फाइल पर मौजूद है। साथ ही यह भी टिप्पणी फाइल पर की गयी है कि जब तक उक्त आपत्तियों निस्तारण नहीं किया जाता तब तक इस संपत्ति के म्यूटेशन पर विचार न किया जाए, लेकिन इन तमाम आपत्तियों के बाद भी इस संपत्ति का भी म्यूटेशन कर दिया गया।
केस-तीन
सिविल एरिया कमेटी के बैठक का एजेंडा के आइटम नंबर-193 के दुकान नंबर-363 करईगंज बीसी बाजार का म्यूटेशन रंजना साहू के पक्ष में किया गया। इस मामले में आफिस के सर्वे की रिपोर्ट में सब डिविजन तथा अवैध निर्माण की टिप्पणी अंकित है, लेकिन सीएसी के कर्ताधार्ताओं ने इस संपत्ति के म्यूटेशन पर भी मोहर लगा दी।

