- उच्च प्राथमिक विद्यालय इंचौली की 20 बीघा जमीन पर हो रही खेती
- हर साल लगाए जाते हैं मवाना शुगर मिल के तोल सेंटर
- बीएसए ने जांच के बाद कार्रवाई का दिया आश्वासन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल की 20 बीघा जमीन पर पिछले कई सालों से गांव के लोगों ने कब्जा कर रखा है। 2004 से ही इस जमीन पर अवैध रूप से खेती की जा रही है। साथ ही हर साल मवाना शुगर मिल का तोल सेंटर भी लगाया जाता है। सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत कार्यालय के एक लिपिक द्वारा पत्र जारी किया जा रहा है जिसकी बिनाह पर स्कूल की जमीन पर लंबे समय से खेती की जा रही है।
वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग अब मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कर रहा है। इंचौली स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय की जमीन पर पिछले कई सालों से गांव का ही रहने वाला गुल्लू फसल की बुआई कर रहा है। बताया जा रहा है कि जिला पंचायत कार्यालय का एक क्लर्क आदेश पत्र जारी करता है। जिसमें गुल्लू को फसल उगाने का ठेका दिया जा रहा है। यह सिलसिला लगभग 20 वर्षों से लगातार चला आ रहा है।
दो माह पहले विभाग को हुई जानकारी
उच्च प्राथमिक विद्यालय इंचौली की जिस जमीन पर लंबे से कृषि होती आ रही है। उसके बारे में विभाग को दो माह पहले ही जानकारी हुई। खंड शिक्षा अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके द्वारा 10 फरवरी 2024 को पत्र जारी कर स्कूल की इंचार्ज से जानकारी मांगी गई है। पत्र में पूछा गया है कि विद्यालय की कितनी पर खेती हो रही है, कृषि भूमि किसके द्वारा ठेके पर दी गई है, कब तक के लिए ठेके पर दी गई है, कितने मूल्य पर ठेका दिया गया है और क्या कभी किसी ने इस पर कोई आपत्ति दर्ज कराई है।

ग्राम प्रधान भी शक के दायरे में
सरकारी स्कूल की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर खेती हो रही है, यह बात विभाग भी मान रहा है। इसमें गांव का प्रधान और एक अन्य शिक्षक शक के दायरे में है। साथ ही जिला पंचायत कार्यालय के एक क्लर्क द्वारा ठेका देने की भी बात सामने आ रही है, लेकिन 2019 के बाद से जिला पंचायत कार्यालय से कोई ठेका नहीं दिया गया है। यानी पिछले पांच सालो से बिना किसी आदेश के ही फर्जी तरीके से जमीन पर फसल बाई जा रही है।
कहां जा रहा फसल से प्राप्त होने वाला पैसा
करीब 20 बीघा जमीन पर लंबे समय से कृषि की जा रही है, कृषि से पैदा हुई फसल को बेचकर पैसा प्राप्त हो रहा है। जबकि हर साल इस जमीन पर मवाना शुगर मिल के तोल सेंटर भी लगते है जिनसे पैसा मिलता है। अब यह पूरी रकम किसके पास जा रही है यह अपने आप में ही बड़ा सवाल है।

