Wednesday, January 28, 2026
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CBI: अनिल अंबानी समूह और राणा कपूर परिवार के खिलाफ सीबीआई ने दाखिल किया आरोपपत्र, करोड़ों की हेराफेरी का आरोप

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: आज शुक्रवार को देश की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दो अलग-अलग मामलों में अनिल अंबानी समूह की कंपनियों और यस बैंक के पूर्व सीईओ राणा कपूर के परिवार के खिलाफ गंभीर आर्थिक अनियमितताओं को लेकर आरोपपत्र दाखिल किया है। यह मामला वर्षों पुराने एक हाई-प्रोफाइल कॉरपोरेट धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है, जिसमें सार्वजनिक धन की सुनियोजित हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं।

अनिल अंबानी, यस बैंक और फर्जी लेन-देन का जाल

सीबीआई के अनुसार, आरोपित कंपनियों में रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) शामिल हैं, जो अनिल अंबानी के ADAG समूह की सहायक कंपनियाँ हैं। दूसरी ओर, आरोप में राणा कपूर की पत्नी बिंदु कपूर और बेटियाँ राधा कपूर व रोशनी कपूर की कंपनियों को भी फर्जी लेन-देन का लाभार्थी बताया गया है।

जांच में सामने आया कि 2017 में यस बैंक ने RCFL में करीब 2045 करोड़ रुपये और RHFL में लगभग 2965 करोड़ रुपये का निवेश नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स और कमर्शियल डेट के रूप में किया था। यह निवेश राणा कपूर की स्वीकृति से हुआ, जबकि उस समय संबंधित कंपनियों की वित्तीय स्थिति डांवाडोल थी।

साजिश और सत्ता का दुरुपयोग

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राणा कपूर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए संकटग्रस्त कंपनियों को धन उपलब्ध कराया। इसके बदले में एडीए ग्रुप ने उनके परिवार की कंपनियों को रियायती दरों पर ऋण व निवेश उपलब्ध कराए। इस साजिश के चलते यस बैंक को करीब 2796.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, अनिल अंबानी समूह और राणा कपूर के परिजनों की कंपनियों को अवैध आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ।

म्यूचुअल फंड्स के जरिए भी घोटाले का विस्तार

जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि अनिल अंबानी के निर्देश पर रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड्स द्वारा राणा कपूर की फैमिली कंपनी मॉर्गेन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड में 1160 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। यही नहीं, उसी म्यूचुअल फंड्स ने यस बैंक से एडीए ग्रुप के डिबेंचर्स 249.80 करोड़ रुपये में खरीदे, जो पूरे लेन-देन तंत्र को और जटिल बनाता है।

2022 में दर्ज हुआ था मामला

बता दें कि, यह मामला वर्ष 2022 में सामने आया था जब यस बैंक के तत्कालीन मुख्य सतर्कता अधिकारी की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की और अब जाकर इस पूरे मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

बता दें कि, यह मामला देश के कॉरपोरेट और बैंकिंग क्षेत्र में बड़े स्तर की वित्तीय अनियमितता और सत्ता के दुरुपयोग का एक और उदाहरण बनकर सामने आया है। जांच के आने वाले चरणों में और भी नामों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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