- जमीन से आसमान तक मौत का मांझा, घर से निकले संभल कर
- पुलिस के दावे धड़ाम, नहीं रुक पा रही है चाइनीज मांझे की बिक्री
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: वसंत पंचमी के दिन यदि पतंग उड़ाने का शौक रखते हैं तो जरूर उड़ाइये, लेकिन चाइनीज मांझे के बगैर क्योंकि लोगों और आपकी सुरक्षा का सवाल है। वहीं दूसरी ओर वसंत पर पतंगबाजी की बात करें तो आसमान में चाइनीज मांझे के रूप में साक्षात मौत उड़ रही है। चाइनीज मांझा मौत का मांझा साबित हो रहा है। पिछले तीन दिन में चाइनीज मांझे की वजह से अनेक हादसे हो चुके हैं। कुछ हादसों में तो लोगों की जान पर बन आयी है।

तीन दिन पहले चाइनीज मांझे से माधवपुरम इलाके में हुए हादसे में एक शख्स 25 टांक लगाने पड़ गए थे। इसलिए वसंत पंचमी पर यदि आप घर से बाहर निकल रहे हैं तो बेहद सावधानी बरते जानी की जरूरत है। खासतौर से जब बाइक या स्कूटी से होकर रोड पर जा रहे हैं। हो सकता है कि कहीं भी चाइनीज मांझे के रूम में मौत की डोर आकर लिपट जाए। यदि ऐसा हो भी जाए तो बजाए घबराहट दिखाने के अपना वाहन रोक कर खुद को मौत की डोर से अलग करने का प्रयास करें।
जमीन से लेकर आसमान तक खौफ ही खौफ
चाइनीज मांझे की बात करें तो इसका खौफ जमीन से लेकर आसमान तक नजर आता है। चाइनीज मांझे के खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो लोग अब तक इसकी वजह से हादसे का शिकार हो चुके हैं वो जब सड़क पर निकलते हैं तो सबसे पहले इसी बात का ध्यान रखते हैं कि कहीं आसपास चाइनीज मांझा तो नहीं। केवल इंसान ही नहीं चाइनीज मांझे का सबसे ज्यादा शिकार परिंदे होते हैं। और बसंत पंचमी पर तो यह खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाने की आशंका जतायी जा रही है।
ये बरतें सावधानी
वसंत पंचमी के मौके पर यदि बाइक या स्कूटी से जा रहे हैं तो अधिक सावधानी बरते जाने की जरूरत है। खासतौर से शहर की घनी आबादी वाले इलाकों में जहां वसंत पंचमी पर पतंगबाजी के जबरदस्त मुकाबले भी होते हैं। जहां ज्यादा पतंगबाजी होगी वहां मौत की डोर न हो इसकी संभावना नजर नहीं आ रही है। बल्कि आशंका तो यह है कि मौत की डोर से पतंग उड़ाने वाले शहर की पुरानी आबादी वाले इलाकों में अधिक होते हैं। ऐसे इलाकों से होकर गुजरने में सावधानी बरतें। प्रयास करें कि दूर से ही यह देख लें कि कहां मौत की डोर बिजली के तारों से झूल रही है। वहां से बच कर निकलने का ही प्रयास करें।
उलझे तो काम ले संयम से
राह से गुजरते वक्त यदि मौत की डोर की चपेट में आ जाएं तो बेहद संयम से काम लें। दरअसल होता यह है कि जब भी रोड पर तेजी से बाइक या अन्य वाहन से गुजरते हैं तो मौत की डोर अक्सर गला या उसके आसपास चेहरे के किसी हिस्से में आकर लिपट जाती है। जिस भी हिस्से पर मौत की डोर यानि चाइनीज मांझा आकर लिपटेगा यदि तुरंत ही नहीं रुके तो शरीर के उस हिस्से को काटता हुआ चला जाएगा।

यदि शरीर के किसी हिस्से से यह उलझ जाती है तो पहला काम तुरंत रुकने का करें। उसके बाद सावधानी से मौत की डोर को शरीर से अलग करें। कई बार ऐसा भी होता है कि मौत की जो डोर आपके शरीर के हिस्से लिपट जाती है। वहीं, डोर किसी दूसरे वाहन चालक के शरीर से भी लिपट जाती है। यदि दोनों में से कोई भी एक इससे अनजान रहता है और तेजी से चलता रहता है तो उससे भी बड़ा नुकसान हो सकता है।
पुलिस के दावे हवा-हवाई
पुलिस की ओर से चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक के तमाम दावे किए गए थे, लेकिन पिछले चार पांच दिनों में जो हादसे इसकी वजह से हुए हैं। उसके बाद चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक के दावों की पोल खुल गयी है। हालांकि इस दौरान चाइनीज मांझे के जखीरे के साथ पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है, लेकिन उसके बाद भी यदि चाइनीज मांझे से पतंग उडाई जा रही है तो पुलिस पर तो सवाल बनता है।
चाइनीज मांझे के साथ दो दबोचे
चाइनीज मांझे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत मंगलवार को लिसाड़ीगेट पुलिस ने श्याम नगर में निवासी दानिश व एहतेशाम को चाइनीज मांझे के जखीरे के साथ पकड़ा है। लिसाड़ीगेट पुलिस ने एक सूचना के आधार पर घेराबंदी कर दोनों को दबोचा है। चाइनीज मांझे के खिलाफ पूरे शहर की पुलिस अभियान चला रही है। खैरनगर में पतंग मांझे का कारोबार करने वालों से भी कहा गया है कि कोई भी चाइनीज मांझा ना बेचे। इससे कोतवाली पुलिस ने भी चाइनीज मांझे के साथ एक शख्स को पकड़ा था।
बसंत पंचमी का पूरा दिन मुहूर्त
हर साल माघ महीने कि शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन से ऋतु परिवर्तन की शुरुआत हो जाती है। साथ ही ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां सरस्वती अवतरित हुई थी। वहीं, एक मान्यता ये भी है कि इस दिन कामदेव अनंग हो गए थे। अर्थात वसंत पंचमी के दिन कामदेव का स्वरूप परिवर्तन हुआ था। जिसके कारण वो अत्यधिक शक्तिशाली होकर पूरी सृष्टि में व्याप्त हो गये थे। इस बार वसंत पंचमी का त्योहार आज मनाया जाएगा।
सदर निवासी पंडित महेश तिवारी बताते हैं कि शास्त्रों में ये कहा गया है कि मुहूर्त पर दिवस भारी अर्थात इस दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक अथवा शास्त्रीय परंपरा के अनुसार काल निर्धारित है। जैसे जन्माष्टमी रात्रिकलिक है। रामनवमी दुपहरकलिक है। इसी प्रकार वसंत पंचमी पर मुहूर्त का बोध नहीं है। पूरा दिन ही शुभ हैं। वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-आराधना का विशेष महत्व होता है। इस दिन पीले कपड़े पहनने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस तिथि पर देवी सरस्वती का जन्म हुआ था।
मुहूर्त शास्त्र में वसंत पंचमी की तिथि को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। जिसमें किसी भी शुभ कार्य को करने में मुहूर्त का विचार नहीं करते हैं। वसंत पंचमी को कई तरह के शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नई वस्तु खरीदना आदि। मां सरस्वती के इस श्लोक से मां का ध्यान करें। इसके बाद ओम ऐं सरस्वत्यै नम: का जाप करें। इस मंत्र के जाप से विद्या, बुद्धि, विवेक बढ़ता है। वसंतोत्सव नवीन ऊर्जा देने वाला उत्सव है। शिशिर ऋतु के असहनीय सर्दी से मुक्ति मिलने का मौसम आरंभ हो जाता है। प्रकृति में परिवर्तन आता है और जो पेड़-पौधे शिशिर ऋतु में अपने पत्ते खो चुके थे वे पुन: नव-नव पल्लव और कलियों से युक्त हो जाते हैं।

