जनवाणी संवाददाता
मेरठ: सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण के प्रकरण में सकंट के बाद फिलहाल कुछ दिनों के लिए हट गए है। सेंट्रल मार्केट में तीन मंजिला कांप्लेक्स समेत 32 अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए पौने दो करोड़ के ई-टेंडर की वित्तीय बिड को लखनऊ मुख्यालय ने कैंसिल कर दिया। जिससे सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को राहत मिल गई है। वहीं, आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता अफताब अहमद का कहना है कि लखनऊ भेजी गई ई-टेंडर की बिड कैंसिल हो गई है। दोबारा से ई-टेंडर डाला जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दुकानों के ध्वस्तीकरण के लिए पौने दो करोड़ का ई-टेंडर भी खोल दिया गया। लखनऊ मुख्यालय मंजूरी के बाद 21 जून को ई-टेंडर की वित्तीय बिड खोल दी।
वित्तीय बिड की स्वीकृति के लिए दोबारा से लखनऊ मुख्यालय भेजा। सोमवार को लखनऊ मुख्यालय में आवास विकास परिषद के अधिकारियों की मीटिंग हुई। जिसमें ध्वस्तीकरण के पौने दो करोड़ के ई-टेंडर की बिड को कैंसिल कर दिया गया। अधिशासी अभियंता अफताब अहमद का कहना है कि ई-टेंडर में काफी खामियां मिली है। ई-टेंडर कंपनी नियमों का पालन नहीं कर रही है। जिसके कारण उसे मुख्यालय से कैंसिल कर दिया गया है। पौने दो करोड़ की ई-बिड कैंसिल होने से मेरठ के सेंट्रल व्यापारियों को काफी राहत मिली। सेंट्रल मार्केट पर छाए संकट के बादल भी कुछ दिनों के लिए हट गए। इंजीनियर का कहना है कि दोबारा से ध्वस्तीकरण के लिए ईटेंडर डाला जाएगा। पंद्रह दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ओला कैब की साइट पर गाड़ियों के फर्जी रजिस्ट्रेशन में दो गिरफ्तार
मेडिकल पुलिस एवं स्वाट टीम नगर ने संयुक्त कार्रवाई में एम-परिवहन ऐप से डाटा लेकर धोखाधड़ी से फर्जी कागजात तैयार कर ओला कैब की वेबसाइट पर आॅपरेटर दर्शाकर फर्जी गाडियां को रजिस्टर्ड करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार किए हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से दो कार तथा पांच मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
मेडिकल थाने पर किशोर शर्मा ने रविवार को मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि उसकी तथा उसके तीन साथियों राहुल कुमार, मनोज कुमार तथा विकास पंवार की स्विफ्ट डिजायर गाड़ियां गढ़ रोड स्थित एसबीआई के जोनल कार्यालय में बतौर टैक्सी के रूप में चल रही हैं। इन गाडियों का डेटा फैसल तथा उसके साथियों ने एम-परिवहन ऐप से चोरी कर लिया। उसके बाद डेटा के आधा पर ओला कैब की वेबसाइट फर्जी रजिस्ट्रेशन करा दिया है। इसका पता उनको तब चला जब उन्होंने अपनी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन ओला कैब पर कराने की कोशिश की, लेकिन वेबसाइट पर पहले से ही उनकी गाड़ियां रजिस्टर्ड थी। किशोर शर्मा की तहरीर पर पुलिस ने फैसल व नरेंद्र समेत सात आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया था।
सोमवार को मेडिकल पुलिस ने नामजद आरोपी जनपद हापुड के थाना सिम्भावली क्षेत्र के गांव वैठ निवासी फैसल पुत्र जाहिद अली तथा थाना बाबूगढ़ के ग्राम भियमारी निवासी नरेंद्र उर्फ नमन पुत्र दलवीर सिंह को गुर्जर चौक से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से दो गाड़ियां तथा पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी एसबीआई जोनल आफिस में आने जाने वाली गाड़ियों के नम्बर नोट कर एम-परिवहन ऐप से डाटा लेकर धोखाधड़ी करके फर्जी कागजात तैयार कर ओला कैब की वेबसाइट पर स्वयं को आपरेटर दिखा कर गाड़ियों को रजिस्टर्ड करके भारी कमीशन प्राप्त करते थे। इस गैंग का सरगना नमन उर्फ नरेन्द्र है। इसके द्वारा ही एम-परिवहन एप का प्रयोग कर फर्जी कागज तैयार कर बेचा जाता है।

